परमात्मा की अटूट भक्ति से परमानंद की प्राप्ति होती है, जिसके सामने सांसारिक सुख नगण्य प्रतीत होते हैं। यह उद्गार कथा वाचक बंधु तिवारी महाराज ने व्यक्त किए। वे रविवार को अरगूपुर कला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन प्रवचन दे रहे थे।

उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण के श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति होती है। गोकर्ण और धुंधकारी की कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नारद जी, जो पूर्व जन्म में दासी पुत्र थे, भक्ति के बल पर अगले जन्म में ब्रह्मा के मानस पुत्र बनने का गौरव प्राप्त किया। साथ ही, उन्होंने ध्रुव की कथा सुनाई, जिन्होंने माता सुनीति के निर्देश पर मात्र पांच वर्ष की आयु में घर छोड़कर महर्षि नारद के मार्गदर्शन में कठोर तपस्या की। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने ध्रुव को दर्शन दिए और उनकी अटल भक्ति के लिए वरदान दिया।

इस अवसर पर यजमान बृजेश विश्वकर्मा और उनकी पत्नी अंजू ने सभी श्रद्धालुओं का स्वागत किया। कथा श्रवण के लिए पूर्व पार्षद बाबूराम राठौर, डोरी सिंह, सुरेंद्र कुमार, राधेश्याम, अनिल कुमार सहित अनेक भक्त उपस्थित रहे।

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