निभाने में दुश्मनी प्यारे….!
हम दोनों ही….
इस क़दर वफादार हैं….
कि कहीं राह में भी….
कभी-कभार ही होता….!
एक दूजे का दीदार है….
जलन एक दूजे के लिए,
इस क़दर परवान है…कि….
मानते हैं दोनों ही….!
ख़ुद को सबसे बड़े जमींदार हैं….
जग जाहिर है प्यारे यहाँ….
कि….दोनों ही…मानते हैं कि…
वे एक दूसरे के गहरे राज़दार हैं…
तनिक भी अफसोस नहीं होता….!
यहाँ किसी को प्यारे….क्योंकि….?
दोनों ही ख़ुद को मानते समझदार हैं
एक अलग सा गुरूर भी…..!
होता है इनमें प्यारे….
कि माँगूगा कुछ भी नहीं उससे….
क्योंकि…साथ में मेरे…सच्चाई मेरी..
और….मेरे परवरदिगार हैं….
एहसास भी होता है…और….
पता भी है….दोनों को ही ….
कि हर एक…असफलता का….!
कारण….वही एक गद्दार है….
एक दूसरे की नजर में….!
बहुरूपिया भी हैं दोनों….
इसीलिए…जमाना भी….भूल वश..
कह जाता है अक़्सर यही….!
कि….वह तो भलामानुष है…और…
आपका सबसे बड़ा मददगार है….
पर जानते हैं यह भी सभी….कि….
ऐसे बरखुरदार प्यारे….!
होते नहीं कभी वफ़ादार हैं….
बात यह भी सही मानो मित्रों…!
कि….एक दूसरे के सामने…..
बने रहते दोनों ही खुद्दार हैं… .
यह अलग बात है कि यहाँ…
हर बात का मजा लेने को…..!
तैयार…बहुत से गद्दार हैं….
और क्या कुछ कहूँ मैं मित्रों….?
दस्तूर है….यह अनोखा प्यारे…
कि दुनिया वालों की नज़र में….
जन्म-जन्मान्तर से….दोनों ही….
आपस में एक दूसरे के….!
घोषित गुनहगार हैं….
बताना चाहूँगा मैं आपको प्यारे….
कि….बस इनको ही ….!
दुनिया कहती पट्टीदार है ….
कि….बस इनको ही ….!
दुनिया कहती पट्टीदार है ….
रचनाकार….
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ
