जौनपुर। भागवत कथा पूरे मनोयोग से सुनने वाले मनुष्य को त्रैतापों से स्वतः मुक्ति मिल जाती है। उन्हें अध्यात्मिक और भौतिक सुख व शांति की प्राप्ति होती है। इस लिए निरंतर ही भगवान की पूजा कर और उनकी भक्ति करनी चाहिए। अपने जीवन काल में एक बार अवश्य ही भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। कथा श्रवण से हमारे जन्मों के पाप नष्ट होने के साथ साथ मन में आध्यात्मिक गुणों का संचार होता है। उक्त बातें गोपालापुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में ब्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए प्रख्यात कथावाचक व सनातन धर्म गुरु रतन वशिष्ठ जी महराज ने कही। उन्होंने कहा कि चौरासी लाख योनियों में करोड़ों वर्षों तक विभिन्न शरीरों में भटकने के बाद अंत में मानव जीवन मिला है। इसकी सार्थकता तभी है जब हम इहलोक से मुक्ति प्राप्त कर लें। अन्यथा फिर उन्हीं योनियों में भटकना पड़ेगा। इस मौके पर परमानन्द तिवारी, भागवत तिवारी ,हर्षू पाठक, अमरनाथ तिवारी, अनिल दूबे,बिनय तिवारी, सुशील तिवारी, दयाशंकर तिवारी, काशीनाथ तिवारी, ओमप्रकाश दूबे,श्रवण तिवारी आदि मौजूद रहे।आयोजक सच्चिदानंद दूबे बब्लू ने आगतो के प्रति आभार प्रकट किया।

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