शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को मुंबई में एक पत्रकार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साफ कह दिया – “हां, हम रिजीम चेंज चाहते हैं।”
ठाकरे अखिल भारतीय मराठी पत्रकार परिषद के पुरस्कार वितरण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के बयान का खुला समर्थन किया। भूषण ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि चल रहे प्रदर्शन सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नहीं, बल्कि “रिजीम चेंज” की लड़ाई हैं।
“अगर आप हमसे चुनाव के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने का अधिकार छीन रहे हैं और आंदोलन करने का अधिकार भी छीन रहे हैं, तो हां, हम इस सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए ही खड़े हैं। आपको क्या कहना है?”
उन्होंने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं पर लाठीचार्ज किया जा रहा है, उनके कपड़े फाड़े जा रहे हैं और उन्हें घसीटा जा रहा है। ठाकरे ने कहा, “ऐसी सरकार को दफन कर देना चाहिए।”
ठाकरे ने सवाल भी उठाया। उन्होंने पूछा कि दिल्ली में हजारों पुलिसकर्मी क्यों तैनात किए गए हैं। क्या वे नवरात्रि में डांडिया खेलने आए हैं? उन्होंने दशहरे के मौके पर कॉकरोच का पुतला जलाने की खबरों का भी जिक्र किया और भाजपा पर तंज कसते हुए कहा, “जो लोग राम को लाने का दावा करते हैं, वे आज कॉकरोच से डरते हैं।”
यह बयान उस समय आया जब देशभर में Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दल और युवा संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रशांत भूषण के “रिजीम चेंज” वाले बयान के बाद राजनीतिक तापमान पहले से ही बढ़ा हुआ था। उद्धव ठाकरे के समर्थन से यह बहस और तेज हो गई।
ठाकरे ने पत्रकारों से भी अपील की। उन्होंने कहा कि देश इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। पत्रकारों को एकजुट होकर लोकतंत्र बचाना चाहिए, वरना स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने मंगलवार को शिवाजी पार्क में होने वाले दशहरा मेलावे में और कुछ कहने का संकेत भी दिया।
इस बयान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया। फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे अपनी ही शिवसेना में रिजीम चेंज नहीं रोक पाए। जब पार्टी ने हिंदुत्व और बालासाहेब ठाकरे के विचारों को छोड़ दिया, तो अंदरूनी उथल-पुथल हुई और असली शिवसेना बन गई। फडणवीस ने कहा कि भारत में सत्ता संविधान और चुनाव के जरिए बदलती है, सड़क से नहीं।
उद्धव ठाकरे का बयान विपक्षी खेमे में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) INDIA ब्लॉक का हिस्सा है और महाराष्ट्र में विपक्ष की प्रमुख आवाज है। ठाकरे ने साफ कर दिया कि अगर वोट देने और विरोध करने का अधिकार छीना जाता है, तो सत्ता परिवर्तन की मांग जायज है।
यह बयान राजनीतिक भाषा को और तीखा बना रहा है। एक तरफ सरकार कह रही है कि सत्ता सिर्फ चुनाव से बदलेगी, दूसरी तरफ विपक्ष कह रहा है कि जब लोकतांत्रिक अधिकार छीने जा रहे हों तो रिजीम चेंज की बात स्वाभाविक है। दोनों तरफ की भाषा तेज है और बहस जारी है।
उद्धव ठाकरे के शब्दों ने एक बात साफ कर दी – विपक्ष अब सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन की भाषा बोल रहा है। दिल्ली के प्रदर्शन, SIR विवाद और चुनाव आयोग पर सवालों के बीच यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना रहेगा।
आधिकारिक स्रोत
दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां और अपडेट देखने के लिए दिल्ली पुलिस के प्रेस रिलीज़ पेज पर जाएं।
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