मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आचार्य सत्येन्द्र दास के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अध्यात्मिक जगत के लिए ये अपूर्णीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों पीजीआई जाकर उनका हाल जाना था।
उनका जन्म संतकबीरनगर जिले में 20 मई 1945 में हुआ था। वे बचपन से ही भक्ति भाव में रहते थे। उनके पिता अक्सर अयोध्या जाया करते थे, वह भी पिता के साथ अयोध्या घूमने जाते थे। उनके पिता अभिरामदास जी के आश्रम में जाते थे। अभिराम दास वही थे, जिन्होंने राम जन्मभूमि में 22-23 दिसंबर 1949 में गर्भगृह में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जी की मूर्तियों के प्रकट होने का दावा किया था। इन्हीं मूर्तियों के आधार पर आगे की लड़ाई लड़ी गई।मूर्तियों के प्रकट होने के दावे और अभिराम दास जी की रामलला के प्रति सेवा देखकर सत्येंद्र दास बहुत प्रभावित हुए। उन्हीं के आश्रम में रहने के लिए उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया। सत्येंद्र दास ने रामलला की सेवा के लिए 1958 में घर छोड़ दिया। उनके परिवार में दो भाई और एक बहन थी, बहन का निधन हो चुका है।
अध्यात्मिक जगत के लिए अपूर्णीय क्षति
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