अफगानिस्तान में एक 45 वर्षीय व्यक्ति द्वारा 6 साल की बच्ची से निकाह करने की घटना ने वैश्विक स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। तालिबान प्रशासन ने इस मामले में कहा कि बच्ची 9 साल की होने पर अपने ससुराल जाएगी। इस बयान ने मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आक्रोश पैदा किया है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने इस प्रथा की निंदा करते हुए इसे बाल विवाह और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर चिंताएं बढ़ी हैं। स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि गरीबी और सामाजिक रूढ़ियां इस तरह की प्रथाओं को बढ़ावा दे रही हैं। इस मामले में बच्ची के परिवार ने कथित तौर पर आर्थिक मजबूरी के कारण यह कदम उठाया। तालिबान ने दावा किया कि वे इस तरह के मामलों की जांच करेंगे, लेकिन उनकी नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने अफगानिस्तान पर और सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है। भारत ने भी इस घटना की निंदा की और अफगान बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्थन जताया। यह मामला अफगानिस्तान में लैंगिक समानता और बाल संरक्षण के लिए चुनौतियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के ऐसी प्रथाएं रुकना मुश्किल है।

