मुंबई। सोने की आसमान छूती कीमतों के बीच बीआईएस का नया फरमान मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस – ब्यूरो आफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणी में शामिल कर दिया है। यह नया नियम जुलाई से लागू हो गया है। हॉलमार्क सोने की शुद्धता की पुष्टि करता है। इस नए नियम के तहत, अब 9 कैरेट के गहनों पर भी हॉलमार्क देना जरूरी होगा। अब तक 24 कैरेट, 23 कैरेट, 22 कैरेट, 20 कैरेट, 18 कैरेट और 14 कैरेट तक के गहनों पर ही हॉलमार्क मिलता था। बीआईएस द्वारा लागू किए गए इस निर्णय से, ग्राहकों को 9 कैरेट सोने के गहनों की शुद्धता का पूरा भरोसा मिलेगा, और सोने की ऊंची कीमतों के बीच सस्ते गहने खरीदना आसान होगा।
ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के अनुसार, अब सभी ज्वैलर्स और हॉलमार्किंग सेंटरों को बीआईएस के नए नियमों का पालन करना होगा। नए नियम के मुताबिक, 9 कैरेट सोना (375 पीपीटी) अब अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे में आ गया है। पहले 9 कैरेट सोने के लिए यह जरूरी नहीं था, लेकिन अब ग्राहकों को सोने की शुद्धता की सही जानकारी देने के लिए इसे भी हॉलमार्क करना जरूरी होगा।
ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शाह ने कहा कि 9 कैरेट सोने की हॉलमार्किंग सरकार का एक अच्छा कदम है। इससे सोने के गहने सस्ती कीमत पर खरीदना आसान हो जाएगा, खासकर मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए, तब जब सोने की कीमतें बहुत ऊंची हों। 9 कैरेट में आधुनिक और स्मार्ट डिजाइन आसानी से बनाए जा सकते हैं, और कंपनियां नए डिजाइन और स्टाइल में इनोवेशन ला सकती हैं। इससे आने वाले समय में निर्यात भी बढ़ सकता है और ऑनलाइन बिक्री में भी 9 कैरेट गहनों को ज्यादा प्राथमिकता मिलेगी। संजय शाह के मुताबिक बीआईएस के इस निर्णय से न सिर्फ स्वर्ण शिल्पी कामगारों को भरपूर रोजगार उपलब्ध होगा, अपितु सोना-चांदी की दुकानों में भी एक बार फिर से ग्राहक रूपी रौनक लौटेगी। संजय शाह ने बताया कि हाल ही में बीआईएस ने जनहित के मद्देनजर नियमों में कुछ बदलाव करते हुए हॉलमार्किंग को लेकर नया फरमान जारी किया है। अधिनियम 2016 के तहत, नियमों की कुछ परिभाषाएं और अपवाद भी बदल दिए गए हैं। सोने की घड़ियों और सोने की पेनों के लिए यह नियम जरूरी नहीं है। इस नियम के अनुसार, सोने का सिक्का उसे माना जाएगा जो 24 कैरेट शुद्ध सोने से बना हो, जिसे सिर्फ सरकारी टकसाल या रिफाइनरी ही बनाती है। संजय शाह ने बताया कि बीआईएस अधिनियम 2016 के तहत होने वाली हॉलमार्किंग इस बात की पुष्टि करती है कि गहनों और बर्तनों में सोने की धातु की कितनी मात्रा है। इससे सोने के बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों का 9 कैरेट सोने में विश्वास भी बढ़ेगा।
अब 9 कैरेट सोने पर भी हॉलमार्किंग होगा अनिवार्य
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