22 जून 2025 को, अमेरिका ने ईरान के तीन प्रमुख परमाणु ठिकानों—फोर्डो, नतांज़, और इस्फहान—पर हवाई हमले किए, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ये हमले “पूरी तरह सफल” रहे और इन ठिकानों को “पूरी तरह नष्ट” कर दिया गया। यह हमला इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बाद हुआ, जहां इज़रायल ने पहले ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे पर हमले किए थे। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, तो और हमले होंगे।
ईरानी अधिकारियों ने हमलों की पुष्टि की और इसे “खतरनाक युद्ध की शुरुआत” करार दिया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इज़रायल और अमेरिका के खिलाफ “वैध आत्मरक्षा” का अधिकार जताया। ईरानी मिसाइलों ने जवाब में इज़रायल के तेल अवीव और हाइफा में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें 11 लोग घायल हुए और एक अस्पताल को भारी नुकसान पहुंचा।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत ने इन हमलों को “परमाणु निगरानी के खिलाफ हमला” बताया और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निष्क्रियता की आलोचना की। रूस और चीन ने भी अमेरिकी हमलों की निंदा की, जबकि ब्रिटेन ने तटस्थ रुख अपनाया।
विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला मध्य पूर्व में तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को बंद करने की धमकी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विश्व समुदाय अब सांस थामे हालात पर नजर रख रहा है।

