गाँव-देश और शहर-शहर,
गली-गली और डगर-डगर….!
हर तरफ़ का है यही हाल…
स्कूलों से ज्यादा देखो,
खुलते जा रहे अस्पताल….
स्कूलों में अब तो…..!
कम होते जा रहे हैं मास्टर,
अस्पतालों में…अनायास ही…
बढ़ते जा रहे हैं डॉक्टर…
बढ़ नहीं रही है स्कूलों में,
छात्रों की संख्या सरकार…पर….
मरीज़ों की अस्पतालों में है भरमार
सुविधाओं से जूझते…..!
दिखते हैं हर स्कूल….
पर…अस्पतालों के तो….
सीसीयु,आईसीयू रहते हरदम फुल
जहाँ स्कूलों मे स्वास्थ्य….!
बनता है मिड डे मील से….
वहीं अस्पतालों में फील गुड कराते
डाइटचार्ट की डील से….
स्कूलों में कापी-किताब,
कभी न हो रही है चेक….
अस्पतालों में तो देखो,
सुबह -शाम हो रहा है रूटीन चेक….
स्कूली छात्रों को देखो बन्धु…!
रह जा रहे हैं निपट निरक्षर….
पर रोगी को देखो….खुद ही अब….
बनता जा रहा है डॉक्टर….
स्कूलों में ऐसे-तैसे बैठने को….!
छात्र-मास्टर है मजबूर….जबकि….
अस्पतालों में बन गया है,
चैम्बर-बेड का बना हुआ है दस्तूर….
स्कूलों में….यूनिफॉर्म की है दिक्कत
अस्पतालों में डॉक्टर्स की तो…!
यूनिफॉर्म में ही होती है दस्तक….
अब क्या बताऊँ मित्रों….
देख कर यह सारी व्यवस्था,
मेरी तो समझ में भी नहीं आता ,
शिक्षा जरूरी है या चिकित्सा…
क्या कहूँ….प्रश्न भी है मुश्किल सा…
यह सब तो आप सभी,
देख रहे हैं बन्धु….फिर…
आज प्राथमिकता का विषय
आखिर क्या हो…?
आप सब ही बताओ,
जीतू,दीपू,टिंकू और चन्दू….!
आप सब ही बताओ,
जीतू,दीपू,टिंकू और चन्दू….!
रचनाकार….
जितेन्द्र कुमार दुबे
अपर पुलिस उपायुक्त, लखनऊ

