- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
इज़रायल में हाल के घटनाक्रमों ने दुनिया का ध्यान खींचा है, क्योंकि देश में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। यह कदम इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, इज़रायल ने यह निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया है, ताकि संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान सीमित किया जा सके और साइबर हमलों को रोका जा सके। इस इंटरनेट ब्लैकआउट ने आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित किया है, क्योंकि संचार के प्रमुख साधन ठप हो गए हैं।
इज़रायल की सरकार ने इस कदम को “आपातकालीन उपाय” करार दिया है, जो देश की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सैन्य अभियानों को गुप्त रखने और ईरान से संभावित साइबर खतरों को कम करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, इस फैसले ने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद पैदा कर दिया है, क्योंकि इंटरनेट बंद होने से सूचना का प्रवाह रुक गया है और लोगों में भय और अनिश्चितता बढ़ गई है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इंटरनेट बंद होने से ऑनलाइन सेवाएं, सोशल मीडिया, और यहां तक कि आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच बाधित हुई है। कुछ का कहना है कि यह कदम सरकार की ओर से नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश है, जबकि अन्य इसे युद्ध के समय का रणनीतिक कदम मान रहे हैं। इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे हवाई हमलों के बीच यह स्थिति और जटिल हो गई है। इज़रायल ने ईरान के कई ठिकानों, जिसमें तेहरान में सरकारी टीवी स्टेशन भी शामिल है, पर हमले किए हैं।
यह इंटरनेट बंदी कितने समय तक रहेगी, इस बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर नजर रखे हुए है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को और प्रभावित कर सकता है। इस बीच, नागरिकों को सूचना के लिए रेडियो और अन्य पारंपरिक माध्यमों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

