जौनपुर । जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भू-माफियाओं द्वारा सरकारी और सार्वजनिक तथा गरीब लोगों के जमीनों पर अवैध कब्जा करने का मामला आये दिन सुर्खियों में रह रहा है। अधिकांश प्रकरणों में अवैध कब्जा करने वालों पर राजस्व अधिकारियों की मिली भगत का आरोप भी खुलकर विपक्षियों द्वारा लगाया जाता है लेकिन कार्यवाही के नाम पर जांच पड़ताल और टीम गठित कर प्रकरण में लीपा पोती करने का प्रयास किया जाता है और अन्ततः निर्णय लेने को विवश होना पड़ता है। वह चाहे बीआरपी का प्रकरण हो फिर कन्हईपुर चांदमारी का है। पहले बीआरपी के प्रकरण में प्रथम पक्ष को राजस्व विभाग द्वारा सही ठहराया जाता रहा जब विद्यालय प्रशासन ने बोर्ड की परीक्षा का बहिष्कार करने पर उतारू हो गया तो प्रशासन पलटी मारते हुए बोर्ड परीक्षा की पूर्व सन्ध्या को उसे अवैध कब्जा बताते हुए बाउड्री वाल को ध्वस्त करा दिया। इसी प्रकार से कन्हईपुर चांदमारी की जमीन भी राजस्व विभाग के अधिकारी उपजिलाधिकारी सदर, सिटी मजिस्ट्रेट, तहसीलदार द्वारा विवादित जमीन पर कब्जा करने वाले के पक्ष में खुलकर जिलाधिकारी के सामने पक्ष रखकर रहे है जबकि उक्त जमीन बन रहे मैरेज हाल का नक्शा पास नहीं है न्यायालयों द्वारा स्थगन आदेश प्राप्त होने का दूसरा पक्ष कागजात प्रस्तुत करने का दावा कर रहा है। मंगलवार को तहसीलदार ने तूल पकड़े हुए इस मामले में दोनों पक्षों को अपने चैम्बर में बुलाया और दोनों पक्षो के अधिवक्ताओं को अपना पक्ष रखने को कहा और दोनों पक्ष के वकीलों ने सम्बन्धित कागजातों का पुलिन्दा प्रस्तुत किया। एक पक्ष का आरोप है कि कंहईपुर में आराजी नंबर 11 के बारे मे ज़ब 1949 का दस्तावेज खसरा 1359 फसली देखा गया तो पता चला कि यह 11 नंबर आराजी भीटा खाते मे दर्ज है. जो कभी किसी के नाम हो ही नहीं सकती, फिर कैसे किसी के नाम हो गयी. दोनों पक्षों के पत्रावलियों का अलोकन कर तहसीलदार ने बताया कि अपनी आख्या के साथ जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगें। अब देखना है कि प्रकरण का किस प्रकार से पटाक्षेप होता है यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

