बेंगलुरु: कर्नाटक में बाइक टैक्सी सेवाओं पर 16 जून 2025 से पूर्ण प्रतिबंध लागू हो गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित बाइक टैक्सी ऑपरेटरों की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने प्रतिबंध को स्थगित करने की मांग की थी। कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत राज्य में बाइक टैक्सी के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण यह फैसला सुनाया। इससे पहले, कोर्ट ने अप्रैल में ऑपरेटरों को अपनी सेवाएं बंद करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था, जिसे बाद में 15 जून तक बढ़ाया गया था।
बाइक टैक्सी बेंगलुरु जैसे ट्रैफिक से जूझते शहर में सस्ता और तेज़ परिवहन साधन थीं। रैपिडो ने दावा किया कि इस प्रतिबंध से कर्नाटक में 6 लाख से अधिक चालकों की आजीविका प्रभावित होगी, जिनमें से 75% के लिए यह उनकी आय का मुख्य स्रोत है। औसतन, ये चालक प्रति माह 35,000 रुपये कमाते हैं। सोशल मीडिया पर इस फैसले की तीखी आलोचना हो रही है। पूर्व इन्फोसिस सीएफओ टी.वी. मोहनदास पाई ने इसे “नागरिक विरोधी” बताया और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से नीति बनाने की मांग की।
ऑटो यूनियनों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है, जो लंबे समय से बाइक टैक्सी को अवैध मानते हुए इसका विरोध कर रही थीं। हालांकि, नासकॉम और चालकों ने सरकार से नियमन बनाकर इस सेवा को वैध करने की अपील की है। चालकों का कहना है कि दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बाइक टैक्सी वैध हैं, फिर कर्नाटक में क्यों नहीं? नम्मा बाइक टैक्सी एसोसिएशन ने परिवहन मंत्री रामलिंगा रेड्डी से मुलाकात कर अपनी चिंताएं जाहिर कीं, लेकिन सरकार ने नीति बनाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इस प्रतिबंध से न केवल चालकों की आजीविका खतरे में है, बल्कि यात्रियों को भी महंगे परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ेगा।

