– ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने हाल ही में ईरान के प्रति समर्थन व्यक्त किया है, जिसने वैश्विक स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स के अनुसार, किम ने कहा कि उत्तर कोरिया ईरान के खिलाफ किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है और वह किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करने को तत्पर है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है, खासकर इजरायल के “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के बाद, जिसने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया। किम का यह बयान वैश्विक साम्राज्यवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश देता है, और यह उत्तर कोरिया की विदेश नीति में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह जानकारी केवल सोशल मीडिया पर आधारित है और आधिकारिक पुष्टि की आवश्यकता है।

किम जोंग-उन का ईरान को समर्थन देने का दावा उनके रूस के साथ मजबूत संबंधों के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। उत्तर कोरिया ने हाल ही में रूस को यूक्रेन युद्ध में सैन्य सहायता प्रदान की है, जिसमें 11,000 से अधिक सैनिक भेजे गए। किम ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को “प्रिय कॉमरेड” कहकर संबोधित किया और रूस के प्रति बिना शर्त समर्थनB का वादा किया। यह संभव है कि ईरान के प्रति उनका समर्थन रूस, चीन और ईरान के साथ एक व्यापक रणनीतिक गठजोड़ का हिस्सा हो, जो वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है। यह कदम उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं और क्षेत्रीय प्रभाव को दर्शाता है।
हालांकि, किम के इस कथित समर्थन की खबरें अभी तक असत्यापित हैं, और विश्वसनीय समाचार स्रोतों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें तेजी से फैलती हैं, लेकिन इनमें अतिशयोक्ति या गलत सूचना की संभावना रहती है। किम जोंग-उन की विदेश नीति हमेशा से गोपनीय और रणनीतिक रही है, और ईरान के प्रति उनका समर्थन क्षेत्रीय और वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इस स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मध्य पूर्व और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है।

