मोकामा, बिहार | बिहार की राजनीति में एक बार फिर खून की होली खेली गई है। मोकामा के ताल का बादशाह रहे दुलारचंद यादव की निर्मम हत्या ने पूरे राज्य को सदमे की चपेट में ले लिया है। लेकिन इस हत्याकांड का असली सूत्रधार कौन? जेडीयू के बहुबली प्रत्याशी अनंत सिंह! हां, वही अनंत सिंह, जिसका नाम अपराध की फेहरिस्त में दर्ज है, जिसकी गोली से निर्दोषों का खून बहा है और जिसकी सियासी महत्वाकांक्षा ने अब एक और बेगुनाह की जान ले ली। पुलिस ने दुलारचंद की हत्या के मामले में अनंत सिंह समेत पांच नामजद आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह अपराधी राजनेता कभी सलाखों के पीछे पहुंचेगा, या फिर बिहार की सत्ता की चौखटें उसे हमेशा बचाती रहेंगी?
कल शाम मोकामा के भदौर थाना क्षेत्र में जो खौफनाक घटना घटी, वह किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं। दुलारचंद यादव, जो जन सुराज के समर्थक थे और कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे, अपने समर्थकों के साथ प्रचार कर रहे थे। तभी अनंत सिंह का काफिला आया और अचानक गोलीबारी शुरू हो गई। दुलारचंद को सीने में दो गोलियां लगीं, और वे खून में लथपथ होकर गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अनंत सिंह खुद हथियार लहराते हुए नजर आए, मानो वे किसी जंग के मैदान में हों। उनके गुर्गे पत्थरबाजी और फायरिंग में जुटे थे, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। दुलारचंद के पोते ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें साफ-साफ अनंत सिंह को मुख्य आरोपी ठहराया गया है। लेकिन अनंत सिंह ने उल्टा काउंटर एफआईआर दाखिल कर दुलारचंद के साथियों पर हमला करने का आरोप लगाया। यह तो वही पुरानी चाल है – अपराधी खुद को पीड़ित बताकर बच निकलने की कोशिश!
अनंत सिंह कौन हैं? बिहार के सबसे कुख्यात अपराधी राजनेताओं में से एक। 2015 में चार युवकों के अपहरण और एक की हत्या के मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। उनके गुर्गों ने पुत्तूस यादव नामक युवक को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था। बार-बार जेल की हवा खाने के बावजूद सियासत में उनकी पकड़ कम नहीं हुई। मोकामा की जनता उन्हें ‘बहुबली’ कहती है, लेकिन सच्चाई यह है कि वे एक खूंखार माफिया हैं, जो चुनावी रणनीति के तहत विरोधियों को रास्ते से हटाते हैं। दुलारचंद की हत्या कोई पहली घटना नहीं; यह अनंत सिंह के साम्राज्य का विस्तार है, जहां गोली चलाना उतना ही आसान है जितना भाषण देना। क्या बिहार की जनता अब भी ऐसे हत्यारों को वोट देगी? या यह हत्याकांड 90 के दशक की जंगलराज की याद दिला देगा?
पुलिस जांच में सीसीटीवी फुटेज और एफएसएल रिपोर्ट की बात हो रही है। पटना ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग ने कहा कि दो लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन अनंत सिंह का नाम अभी भी फरार है। चुनाव आयोग ने भी रिपोर्ट मांगी है, मगर सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ कागजी कार्रवाई होगी? दुलारचंद के परिवार ने अनंत सिंह पर सीधा आरोप लगाया है, जबकि सिंह ने आरजेडी के सूरजभान सिंह पर साजिश का इल्जाम ठोका। यह राजनीतिक साजिश का जाल है, जहां निर्दोषों का खून बहाया जा रहा है। सांसद पप्पू यादव ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं, और जनता में आक्रोश फैल रहा है। मोकामा में तनाव चरम पर है – दुकानें बंद, सड़कें सुनसान।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अब फैसला लेना होगा। क्या वे अपने गठबंधन के इस अपराधी को संरक्षण देंगे, या न्याय की मांग करेंगे? दुलारचंद यादव की आत्मा चीख रही है – न्याय दो, या फिर बिहार फिर से खून की नदियों में बह जाएगा! अनंत सिंह जैसे तत्वों को सियासत से बाहर करना होगा, वरना बिहार का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा। जनता जागे, वोट की ताकत से इन बहुबलियों को सबक सिखाए।
यह रिपोर्ट घटना स्थल से एकत्रित तथ्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर आधारित है। जांच जारी है।

