28 मई 2025 को अमर उजाला ने खबर दी कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को लेकर चल रही सुनवाई से जुड़ा है। कुछ याचिकाकर्ताओं ने जस्टिस वर्मा के फैसलों पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद यह चर्चा शुरू हुई।
वक्फ कानून को लेकर देश में तीखी बहस चल रही है। कुछ लोग इसे धार्मिक स्वायत्तता के लिए खतरा मानते हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यह संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता लाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अंतरिम राहत पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है, और अगली सुनवाई बुधवार को होगी।
यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील है, और इसके परिणाम देश की न्यायिक और धार्मिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि महाभियोग की प्रक्रिया जटिल है और इसके लिए ठोस आधार चाहिए। जनता और राजनीतिक दलों की नजर इस मामले पर टिकी है।

