एटा।जैथरा थाना क्षेत्र के कठिगरा गांव निवासी संतोष नामक युवक की पटे से की गई बेरहमी से पिटाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
पीड़ित संतोष ने बताया कि हम सगे दो सगे भाइयों के बीच जमीनी हिस्सेबांट को लेकर चल रहे जमीनी विवाद में पुलिस चौकी प्रभारी ने हमें चौकी पर बुलाया था।
जब हम बीते दिन चौकी गये तो पहले मुझे दिनभर चौकी में बैठाया गया और फिर देर शाम थाने भेज दिया जब कि मैने चौकी इंचार्ज से कई बार आपस में फैसला कर लेने की बात कही वह नहीं माने रातभर में जैथरा थाने में बंद रखा गया।
सुबह परिजन मेरी जमानत कराने थाने आये तो परिजनों के थाने आने पर दरोगा ने आक्रोशित होकर प्रियजनों के सामने संतोष को खंभे से पकड़वाकर पटे से पीटना शुरू कर दिया। संतोष ने बताया कि उसे बिना किसी जुर्म के इस अमानवीय व्यवहार का शिकार बनाया गया, लेकिन वह डर के कारण आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम नहीं बताबता सका। उसने बताया कि पुलिस गिरफ्त से छूटने के बाद मेंने घटना कि शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा श्याम नारायण सिंह से प्रार्थना पत्र देकर की है उन्होने कार्यवाही का आश्वासन दिया है किंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
घटना की जानकारी मिलते ही जिले भर में आम जन में पुलिस कार्यप्रणाली के प्रति आक्रोश फैल गया। स्थानीय नागरिकों ने जैथरा पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की।
सीओ अलीगंज नीतीश गर्ग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कर आवश्यक कार्यवाही हेतु कहा हैऔर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, जैथरा थाना प्रभारी शंभू नाथ सिंह से जब संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। कानूनी नजरिए से, एडवोकेट उज्जवल पांडेय ने बताया कि किसी भी
नागरिक के साथ पुलिस हिरासत में इस प्रकार की मारपीट संविधान और कानून दोनों का उल्लंघन है। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 330 के तहत यह एक दंडनीय
अपराध है। सुप्रीम कोर्ट भी इस तरह की घटनाओं को गंभीर मानवाधिकार हनन मानता है और दोषियों को कठोर सजा की बात कह चुका है। पीड़ित परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग की है। यह घटना न सिर्फ पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गहरा प्रश्नचिन्ह लगाती है?

