धनबाद।
जोगता थाना क्षेत्र के सिजुआ न्यू साइडिंग नंबर एक बस्ती में मंगलवार की रात एक ही परिवार के तीन सदस्यों — राजा अंसारी (25), उनकी पत्नी अमीना खातून (20) और दो वर्षीय पुत्री मायरा — की मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।
घटना के बाद बुधवार को सिजुआ और आसपास का पूरा क्षेत्र मातम में डूब गया।
तीनों शव पहुंचे घर, मातम में डूबा परिवार
बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव जब तेतुलमुरी के दाउद नगर स्थित पिता जमाल अंसारी के घर पहुंचे, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
मां रजिया खातून और अन्य परिजन का रो-रोकर बुरा हाल था।
तीनों का जनाजा एक साथ निकाला गया और भद्रीचक फतेहपुर कब्रिस्तान में नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
जनाजे में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए — माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।
पोस्टमार्टम में इलेक्ट्रिक बर्न जैसे निशान, रिपोर्ट की प्रतीक्षा
पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने तीनों के हाथों में इलेक्ट्रिक बर्न जैसे निशान पाए जाने की मौखिक जानकारी दी है।
हालांकि, जहर खाने की आशंका से इंकार किया गया है, लेकिन करंट से मौत की पुष्टि अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है।
चिकित्सकों ने बताया कि यह संभवतः किसी विद्युत उपकरण (जैसे हीटर आदि) के संपर्क में आने से हुआ हो सकता है।
फिलहाल, अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
परिजनों का बयान — एक-दूसरे को बचाने में गई तीनों की जान
मृतक राजा अंसारी के पिता जमाल अंसारी ने बताया कि मंगलवार की शाम उनकी दो वर्षीय पोती मायरा ने घर में रखे हीटर में हाथ डाल दिया था।
उसे बचाने के लिए मां अमीना और फिर पिता राजा दौड़े, लेकिन तीनों करंट की चपेट में आ गए।
परिजनों का कहना है कि यह पूरी तरह दुर्घटनावश हुआ हादसा है।
मायके पक्ष में आक्रोश, प्रबुद्ध लोगों ने कराया शांत माहौल
मृतका अमीना खातून के मायके बालीडीह (बोकारो) से बुधवार को परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में सिजुआ पहुंचे।
घटना को लेकर कुछ समय के लिए माहौल भावनात्मक और तनावपूर्ण हो गया, लेकिन स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया।
अमीना की मां हलीमन बीबी ने बताया कि अमीना आठ भाई-बहनों में सबसे छोटी थी और परिवार की सबसे प्यारी सदस्य थी।
इलाके में पसरा सन्नाटा, हर आंख नम
सिजुआ न्यू साइडिंग बस्ती में बुधवार को मातम छाया रहा।
स्थानीय लोगों ने बताया कि राजा अंसारी मेहनती मजदूर थे और परिवार शांत स्वभाव का था।
लोगों का कहना है कि ऐसा दर्दनाक मंजर उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल —
“आख़िर एक ही झटके में तीन जिंदगियां कैसे चली गईं?”

