21 जून 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तान सरकार ने 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया। यह नामांकन भारत-पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव को कम करने में उनकी कथित “निर्णायक कूटनीतिक भूमिका” के लिए है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद उन्होंने भारत-पाक युद्ध को टाला। उन्होंने लिखा, “मैंने भारत और पाकिस्तान को युद्ध से बचाया, लेकिन नोबेल कमेटी मुझे कभी पुरस्कार नहीं देगी।”
भारत ने ट्रंप के दावों को खारिज किया, विदेश मंत्रालय ने कहा कि युद्धविराम पाकिस्तान के अनुरोध पर हुआ, न कि अमेरिकी हस्तक्षेप से। आलोचकों ने इसे ट्रंप का “प्रचार स्टंट” बताया। एक एक्स पोस्ट में लिखा गया, “ट्रंप को शांति पुरस्कार? यह तो मजाक है। वह सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहते हैं।” वहीं, उनके समर्थकों ने उनकी “बोल्ड डिप्लोमेसी” की तारीफ की।
ट्रंप ने अन्य कूटनीतिक प्रयासों का भी जिक्र किया, जैसे अब्राहम समझौते, सर्बिया-कोसोवो मसले, और कांगो-रवांडा शांति संधि। उन्होंने कहा, “मुझे पुरस्कार की जरूरत नहीं, लोगों को सच पता है।” हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-पाक मसले में उनकी भूमिका अतिशयोक्तिपूर्ण है।
पाकिस्तान के इस कदम ने भारत में विवाद छेड़ दिया। विपक्षी नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि क्या यह नामांकन भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाता है। सोशल मीडिया पर बहस तेज है, कुछ लोग इसे ट्रंप की उपलब्धि मानते हैं, तो अन्य इसे पाकिस्तान की चाल कहते हैं। यह नामांकन भारत-पाक संबंधों में और तनाव ला सकता है।

