अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 12 जुलाई 2025 को यूरोपीय संघ (ईयू) और मेक्सिको से आयातित वस्तुओं पर 30% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो 1 अगस्त 2025 से लागू होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि अमेरिका का व्यापार घाटा राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता कम करना है। यूरोपीय संघ ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है, इसे वैश्विक व्यापार के लिए हानिकारक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है और भारत जैसे देशों पर भी अप्रत्यक्ष दबाव डाल सकता है। भारत को फिलहाल इस टैरिफ से छूट मिली है, क्योंकि दोनों देश एक व्यापार समझौते के करीब हैं। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि समझौता विफल हुआ, तो भारत को भी भविष्य में टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। यह कदम ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत उन्होंने पहले भी कई देशों पर टैरिफ लगाए हैं। वैश्विक बाजारों में इस घोषणा से हलचल मच गई है, और कई देश जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं।

