अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षर युक्त आरोप की प्रति बार के अध्यक्ष को सौंपकर रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने की मांग की:
मछलीशहर ।तहसील के दर्जनों अधिवक्ताओं ने लिखित आरोप लगाया की अविवादित मामलों में भी राजस्व प्रशासन द्वारा फैसले के निस्तारण में रिश्वत की मांग की जाती है और रिश्वत का दायरा भी बढ़ाकर 100% अधिक कर दिया गया है।
तहसील के पूर्व शासकीय अधिवक्ता संदीप गुप्ता पवन कुमार गुप्ता आशीष चौबे शैलेश यादव, हरिशंकर सिंह नंदकुमार सिंह, ललित मोहन तिवारी, विनय प्रिय पांडेय, उमेश श्रीवास्तव, आलोक विश्वकर्मा अच्छेलाल विश्वकर्मा, अमर बहादुर यादव, बाबूराम, हरिनायक तिवारी अशोक श्रीवास्तव सहित कई दर्जन अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि तहसील के सभी विभागों,अधिकांश न्यायालयों,कार्यालयों में खुलेआम लूट मची हुई है।जिन पत्रावलियो में कोई विवाद भी नहीं रहता उसमें भी 1500/ से ₹2000/की मांगा जाता है न देने पर पत्रावली खारिज करने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा विवादित पत्रावलियों में तो लाखों रुपए तक की रिश्वत ली जा रही है। अधिवक्ताओं ने तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया है। जनप्रतिनिधियों से भी अनुरोध किया है कि आम जनता को पैसे के बल पर मिल रहे न्याय और तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के प्रति अपनी जिम्मेदारी को महसूस करें और शासन प्रशासन का ध्यान इस तरफ आकर्षित कराएं।तहसील के सभी न्यायालयों,कार्यालयों की जड़ में तहसील में संबंधित अधिकारियों द्वारा तैनात किए गए प्राइवेट कर्मचारी हैं,जिसके माध्यम से मोलभाव कर धनदोहन कराया जाता है।

