महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों ने लड़ी लड़ाई, बने कानून: सीजेएम
दीवानी न्यायालय में पहली बार न्यायिक अधिकारी के प्रमुख पदों पर हैं महिला जज
जौनपुर दीवानी न्यायालय संघ सभागार में अध्यक्ष जितेंद्र नाथ उपाध्याय की अध्यक्षता में महिला सशक्तिकरण पर गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें समस्त महिला न्यायिक अधिकारी एवं महिला अधिवक्तागण उपस्थित थीं। महिला अधिवक्ताओं ने जिला जज एवं मंचासीन अन्य न्यायिक अधिकारियों का स्वागत किया। अधिवक्ता रीता सरोज ने स्वागत गीत गाया एवं संचालन किया।
जिला जज वाणी रंजन अग्रवाल ने कहा कि भारत के सामाजिक आर्थिक प्रगति महिलाओं के सामाजिक आर्थिक प्रगति पर ही निर्भर है। महिला सशक्तिकरण में स्वतंत्रता, समानता के साथ-साथ अभिव्यक्त की स्वतंत्रता के पहलू भी शामिल हैं। पहले महिला न्यायिक अधिकारियों की संख्या बहुत कम थी।इस समय दीवानी न्यायालय में 21 महिला जज हैं। यहां प्रमुख न्यायिक पदों पर परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश रीता कौशिक, सीजेएम ज्योति अग्रवाल, प्रभारी विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव शिल्पी जी पदासीन हैं। घरेलू हिंसा व परिवार न्यायालय की कोर्ट में महिलाओं को न्याय दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है। आज महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। सीजेएम ज्योति अग्रवाल ने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों ने भी बहुत लड़ाई लड़ी व कानून बने। अधिवक्ता मंजू शास्त्री ने कहा कि दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा एवं यौन शोषण आदि महिला सशक्तिकरण में मुख्य बाधा है। इन्हें दूर करके ही देश का विकास संभव है। अधिवक्ता मंजीत कौर ने कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में 50 फीसद आरक्षण मिलना चाहिए तभी महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी होगी और देश प्रगति करेगा। महिलाओं को हर क्षेत्र में समान अवसर मिलना चाहिए। इस अवसर न्यायिक अधिकारी रोली तिवारी, रमसा तनवीर, जागृति केसरवानी, मेधा कुशवाहा ,सुधा शर्मा एवं महिला अधिवक्ता साधना सिंह, मीरा सिंह,बिंदु चौधरी,रागिनी पांडेय,दीपा साहू ,सारिका यादव,रूपा सिंह,किरण सिंह,शमी फातिमा, सविता यादव,संजू ,रेखा मिश्रा,चंदना मिश्रा,रोली विश्वकर्मा,रंजीता शर्मा आदि उपस्थित थीं।

