भारत ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रहा है, जो 2030 के पेरिस समझौते के लक्ष्य से पांच साल पहले हासिल हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 484.8 गीगावाट की कुल क्षमता में से 242.8 गीगावाट अब सौर, पवन, हाइड्रो, और न्यूक्लियर जैसे स्वच्छ स्रोतों से आता है। यह उपलब्धि भारत की जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक नेतृत्व को दर्शाती है। 2024-25 में 29.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ी गई, जिसमें 23 गीगावाट सौर और 4 गीगावाट पवन ऊर्जा शामिल है। पीएम मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि भारत के सतत विकास और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन को दर्शाती है। यह अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक मिसाल है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, और यह उपलब्धि उस दिशा में मजबूत कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह प्रगति वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक नया मानक स्थापित करती है।

