पहलगाम हमले के बाद, नरेंद्र मोदी सरकार ने वैश्विक समर्थन जुटाने के लिए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडलों को सियोल, दोहा और वाशिंगटन जैसे शहरों में भेजा है। 6 जून 2025 को, यह पहल चर्चा का केंद्र रही। सरकार का दावा है कि यह कदम भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों को वैश्विक समर्थन दिलाने के लिए है। हालांकि, विपक्ष ने सरकार पर बिना उनकी सहमति के प्रतिनिधिमंडल चुनने का आरोप लगाया। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को अपने सैन्य अभियानों के लिए पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला, जिसके कारण यह कूटनीतिक प्रयास शुरू किया गया। अमेरिकी सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने कहा कि कश्मीर अभी भी दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण है। यह पहल भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने की कोशिश को दर्शाती है, लेकिन घरेलू राजनीतिक मतभेद इसे जटिल बना रहे हैं।

