प्रशांत त्रिपाठी
उन्नाव: जनपद की नवीन मंडी इन दिनों बड़े व्यापारियों की दबंगई और तानाशाही का केंद्र बनती जा रही है। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि छोटे व्यापारियों और बाहर से आने वाले किसानों को मंडी परिसर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा। कई दिनों से मंडी के मुख्य द्वार पर ताला डाल दिया गया है और गेट से ही छोटे व्यापारियों को वापस भेजा जा रहा है, जिससे दूर-दराज से आए किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बड़े व्यापारियों की मनमानी से मंडी में अराजकता
स्थानीय जानकारी के अनुसार गोलू शुक्ला, महेंद्र, श्रीकांत, जावेद आदि बड़े व्यापारी मंडी के भीतर अपनी मनमानी चला रहे हैं। ये व्यापारी तीन-तीन, चार-चार दुकानें कब्जा कर उन्हें किराए पर चढ़ाते हैं और खुलेआम अवैध वसूली करते हैं। इस रवैये से छोटे व्यापारियों को हर दिन हजारों रुपये का नुकसान हो रहा है, वहीं गरीब किसान मंडी में अपने माल की सही कीमत भी नहीं पा पा रहे।
हरकतों के पीछे छिपे मुख्य कारण
1. शासन ने हाल ही में अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं और मंडी की दुकानों पर कब्जा जमाए व्यापारियों को नोटिस भी जारी हो चुके हैं। इनमें नए सर्किल रेट के अनुसार तीन साल का किराया वसूलने की प्रक्रिया चल रही है।
2. जेई (जूनियर इंजीनियर) द्वारा दुकानों की नाप कराई जा रही है, जिससे अवैध कब्जाधारी व्यापारियों में बेचैनी बढ़ी है और वे विरोध पर उतर आए हैं।
3. कुछ व्यापारी किसानों से उनकी दुकानों के सामने फट्टा लगवाकर उनसे अवैध रूप से किराया वसूल रहे हैं।
4. अक्टूबर से यूजर चार्ज न जमा करने वाले फल व्यापारी ही आज मंडी में सबसे अधिक विवाद खड़े कर रहे हैं।
किसानों को सड़कों पर बैठने की मजबूरी
अवैध कब्जे की वजह से मंडी के भीतर जगह कम पड़ गई है। चबूतरों पर जबरन कब्जा जमा लिया गया है, जिससे किसानों को सड़क पर बैठकर अपने उत्पाद बेचने पड़ रहे हैं। यह न सिर्फ अराजकता फैलाता है, बल्कि यातायात में भी बाधा उत्पन्न करता है।
प्रशासन पर दबाव, जेई को धमकी
सबसे गंभीर मामला महेंद्र कुमार, जो ‘नेशनल फ्रूट कंपनी’ के नाम से जाने जाते हैं, उनके खिलाफ सामने आया है। उन्होंने जबरन दुकान पर कब्जा जमा रखा है और कई बार जेई और मंडी निरीक्षक को ट्रांसफर कराने की धमकी तक दी है। उनके खिलाफ कई बार नोटिस भी जारी किए गए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक दुकान खाली नहीं की है।
जानकारी के अनुसार, अवैध कब्जाधारियों को रिक्त स्थान पर स्थानांतरित करने की फाइल जिलाधिकारी कार्यालय से अनुमोदित हो चुकी है। मंडी सचिव ने सिटी मजिस्ट्रेट को कई पत्र भेजे हैं और मौखिक रूप से भी वार्ता की है, लेकिन अब सचिव पर भी अनैतिक दबाव डाला जा रहा है।

