नालासोपारा (पूर्व) की लक्ष्मी छाया कॉ.हा.सोसायटी में फ्लैट नंबर 402 को लेकर विवाद गहरा गया है। फ्लैट मालिक रामजी पारसनाथ त्रिपाठी का दावा है कि तथाकथित वकील चंद्रप्रकाश केसरीप्रसाद सिंह (सी.पी. सिंह) ने उनकी संपत्ति को धोखे से अपनी पत्नी नीलम सिंह के नाम बेच दिया। त्रिपाठी का कहना है कि फ्लैट का दस्तावेज (क्रमांक 7822/2002) बेसिन कैथोलिक को.ऑ.बैंक में गृहकर्ज के लिए गिरवी है, जिसकी जानकारी सी.पी. सिंह को थी।
सी.पी. सिंह ने सर्च रिपोर्ट में स्वयं लिखा कि फ्लैट पर बैंक का कर्ज है और दरवाजे पर बैंक का नेम प्लेट भी लगा था, जिसे सिंह ने हटा लिया। जब बैंक कर्मचारी नेम प्लेट दोबारा लगाने आए, तो सिंह ने उनसे झगड़ा किया। सोसायटी के पुराने बोर्ड पर आज भी रामजी त्रिपाठी का नाम दर्ज है।
आरोप है कि सी.पी. सिंह ने यह फ्लैट अपनी पत्नी को निःशुल्क हस्तांतरित कर दिया, लेकिन त्रिपाठी को कोई राशि नहीं मिली। 2009 से 2025 तक नीलम सिंह का ताबापावती पत्र नहीं बनाया गया। रजिस्ट्रार ने सिंह दंपति के मूल पहचान पत्र भी नहीं देखे। इस मामले में गु.र.क्र. 40/24 दर्ज है और प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है।
त्रिपाठी ने दावा किया कि दस्तावेज क्रमांक 11965/2009 में सिंह दंपति के हस्ताक्षर और अंगूठे हैं, लेकिन उनका कोई अंगूठा या हस्ताक्षर नहीं। उन्होंने चुनौती दी कि यदि कोई उनके हस्ताक्षर या अंगूठा साबित कर दे, तो वह सभी एफआईआर वापस ले लेंगे और फ्लैट मुफ्त छोड़ देंगे। त्रिपाठी ने धमकियों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि मामला हिंसा से नहीं, बल्कि और उलझेगा।

