पुलिस साइलेंट, एक सत्ताधारी विधायक का नाम आ रहा सामने मामले में।
सतना। विगत कुछ वर्षों में आम जनता की चर्चा के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि, सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के दबाव में पुलिस प्रशासन सहित जिला प्रशासन के अन्य विभागों के जिम्मेदार शासन के कर्मचारी कार्रवाई करने में हिचकिचाते है।
ऐसा ही कुछ पीड़ित पत्रकारों के मामले में भी हुआ। विधायक जी बोर्ड बैंक के लालच में,उनके पास समाज सेवा का चोला ओढ़कर पहुंचे।
कई लोगों को यह आश्वासन दे दिया गया कि, आपके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होगी। लेकिन विधायक जी मामले की बारीकी को समझे बिना यह फैसला ले लिया गया। लेकिन पत्रकार भी इन गतिविधियों को भांप चुके हैं। आगामी दिनों में अगर पीड़ित पत्रकारों के मामले में करवाई नहीं हुई तो कई अन्य तरह के हथकंडे अपनाए जाएंगे।
पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता को एफआईआर से आखिर परहेज क्यों?
सतना। विगत दिनों पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एक पत्रकार द्वारा आवेदन दिया गया। पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता के नाम दिनांक 10.4.2025 को उक्त दिनांक को अवकाश का दिन था। माननीय एसपी साहब आशुतोष गुप्ता की अनुपस्थिति थी, उनकी अनुपस्थिति में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह को आवेदन दिया गया। उक्त जांच डीएसपी हेड क्वार्टर वीरेंद्र बहादुर सिंह को सौंपी गई, जिनका वर्तमान समय में तबादला हो चुका है। उसमें पक्षकारों,गैर पक्षकारों के भी बयान सूत्रों के मुताबिक हो गए। तो अब प्रश्न यह उठता है कि,
पुलिस अधीक्षक को एफआईआर से परहेज क्यों है?
ईमानदार कर्तव्य निष्ठावान पुलिस अधीक्षक हमारे सतना के जिन्होंने अपना कार्यकाल का 3 वर्ष बिताया हो। तो क्या इन 3 वर्षों में इसी तरह की जांच और कार्यप्रणाली इनके द्वारा संचालित की गई।
सूत्रों के मुताबिक फरियादी द्वारा केसी शुक्ला के नाम कोटर निवासी के पक्ष में आवेदन दिया गया। मगर सूत्रों के मुताबिक यह पता चला कि, खाकी के एक नुमाइंदे रिश्वतखोर के साथ केसी शुक्ला पहुंचा,एक सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि के घर ।
जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष का वह भी एक विधानसभा का।
और जनप्रतिनिधि सत्ता पक्ष के द्वारा फोन किया गया,जिले के कप्तान पुलिस अधीक्षक को सूत्रों के मुताबिक इसमें कोई कार्यवाही ना की जाए। ऐसे में कहीं ना कहीं हमारे ईमानदार कर्तव्य निष्ठ पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता की कार्य प्रणाली पर भी प्रश्न उठने लगे है। दिनांक 10.4.25 को आवेदन दिया गया आज 8 जून 2025 है,तो हम तो यही कहेंगे की पुलिस अधीक्षक कार्यालय की शिकायत बीरबल की खिचड़ी से कम नहीं। आज जब एक पत्रकार के साथ जिले के कप्तान के कार्यालय में ऐसा हो रहा तो आम जनता के साथ क्या होता होगा?
पीड़ित पक्षकार का आवेदन पुलिस अधीक्षक के कार्यालय की, रद्दी खाने की आलमारी की धूल बन गया।
वही जब केसी शुक्ला के बारे में जानकारी जुटाई गई। तो पता यह चला की कभी इसकी शादी ही नहीं हुई, मगर गौर की बात यह है की यह दो पत्नियों को रख चुका है। एक लखनऊ वाली और दूसरी की भी जानकारी हासिल की जा रही,सूत्रों के मुताबिक। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है, की इसकी कभी शादी ही नहीं हुई।

