- आस्था संगतानी
उस नन्हीं-सी जान की क्या गलती थी?
फिर उस बेगुनाह को किस बात की सज़ा मिली थी?
थी वो 19 वर्ष की बच्ची,
बढ़ती उम्र, लेकिन अब भी थी कच्ची।
दुपट्टा ओढ़े, सूट पहनने,
नाज़ुक कलाई और कुछ गहने।
चीखी, चिल्लाई, लेकिन न सुनी उसकी एक भी बात।
कुछ दानव पकड़े उसके हाथ!
फड़फड़ाई, हाथ-पैर चलाए,
क्या इतना कमज़ोर था वो भगवान, जो एक बेगुनाह को न बचा पाए?
इतना दुर्बल ईमान,
इतनी नीच हरकत के बाद किस बात का अभिमान?
उड़ती चिड़िया दबोची गई,
और बेअंत ख़ून की नदियाँ बही।
लेकिन हम तो दोष देने में मशगूल रह गए,
और ऐसे कई अपराध सहते रह गए।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,
लेकिन बेटों को आगे बढ़ाओ और सिखाओ कि—
कन्या का सम्मान ही है सही अभिमान।

