–ओमकार त्रिपाठी
भारत में बढ़ता तापमान और जलवायु परिवर्तन अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आपदा का रूप ले चुका है। गर्मी की लहरें, सूखा, बाढ़ और अनियमित मानसून जैसे प्रभावों ने देश के करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत सरकार को इस संकट से निपटने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है। नीचे कुछ प्रमुख उपाय सुझाए गए हैं, जिन्हें सरकार को प्राथमिकता के आधार पर लागू करना चाहिए।
1. नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना
भारत में कोयले पर निर्भरता अभी भी बहुत अधिक है, जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का प्रमुख कारण है। इसे कम करने के लिए सौर, पवन और हाइड्रो ऊर्जा में निवेश को तेज करना जरूरी है।
कदम: सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सब्सिडी बढ़ाना, ग्रामीण क्षेत्रों में सौर पैनलों का वितरण, कोयला आधारित संयंत्रों को चरणबद्ध तरीके से बंद करना
लक्ष्य: 2030 तक 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का रोडमैप तैयार करना।
2. जंगल और हरित क्षेत्रों का विस्तार
जंगलों की कटाई और बढ़ता शहरीकरण तापमान में वृद्धि का मुख्य कारण हैं। सरकार को वृक्षारोपण और वनों के संरक्षण पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
कदम: ‘हरित भारत मिशन’ के तहत हर जिले में वृक्षारोपण, शहरी क्षेत्रों में ग्रीन बेल्ट का विकास, अवैध कटाई पर सख्त कानून लागू करना
लक्ष्य: 2030 तक देश के 33% भूभाग को वन क्षेत्र में बदलना।
3. जल संरक्षण और प्रबंधन
बढ़ते तापमान के साथ-साथ भारत जल संकट की ओर भी बढ़ रहा है। नदियों का सूखना और गिरता भूजल स्तर चिंताजनक है।
कदम: ‘जल शक्ति अभियान’ को अधिक प्रभावी बनाना, वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करना, नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं को तेज करना
लक्ष्य: हर गांव में जल संरक्षण की व्यवस्था और भूजल रिचार्ज को बढ़ावा देना।
4. शहरी नियोजन में सुधार
शहरों में कंक्रीट के जंगल और हीट आइलैंड प्रभाव के कारण तापमान अधिक बढ़ रहा है।
कदम: स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में ग्रीन बिल्डिंग अनिवार्य करना, छतों पर सोलर पैनल और हरित छतों को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता देना
लक्ष्य: 2027 तक प्रमुख शहरों में 50% पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक बनाना।
5. कृषि और किसानों का समर्थन
बढ़ता तापमान और अनियमित मानसून किसानों की आजीविका के लिए खतरा बन गया है।
कदम: जलवायु-अनुकूल फसलों को बढ़ावा देना, ड्रिप इरिगेशन और जल-बचत तकनीकों के लिए सब्सिडी, फसल बीमा योजनाओं को सशक्त बनाना
लक्ष्य: 2025 तक 50% किसानों को जलवायु-अनुकूल खेती के लिए प्रशिक्षित करना।
6. जागरूकता और शिक्षा
जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती है।
कदम: स्कूल पाठ्यक्रम में जलवायु परिवर्तन को अनिवार्य बनाना, स्थानीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री वितरित करना, जनभागीदारी से अभियान चलाना
लक्ष्य: 2025 तक 80% जनसंख्या तक जलवायु जागरूकता कार्यक्रम पहुंचाना।
7. आपदा प्रबंधन को मजबूत करना
गर्मी की लहरों और अन्य जलवायु आपदाओं से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन ढांचे को और मजबूत करना आवश्यक है।
कदम: हर जिले में हीटवेव शेल्टर स्थापित करना, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को उन्नत करना, स्थानीय स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया टीमें बनाना
लक्ष्य: 2025 तक सभी संवेदनशील क्षेत्रों में प्रभावी आपदा प्रबंधन ढांचा तैयार करना।
निष्कर्ष
बढ़ता तापमान केवल भारत की नहीं, बल्कि पूरे विश्व की समस्या है। लेकिन भारत जैसे विशाल और विविध देश में इसके प्रभावों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर निर्णायक कदम उठाने होंगे।
ऊपर बताए गए उपाय केवल नीति का हिस्सा नहीं बनने चाहिए, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की ज़रूरत है। एक हरित भारत की दिशा में ठोस कार्यवाही ही आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण दे सकती है।

