कादीपुर थाना के अंतर्गत आने वाली ग्रामसभा मझगवां में कादीपुर थाने की पुलिस व राजस्व विभाग की उदासीनता,हठधर्मिता व मनमाना पूर्ण कार्यप्रणाली के कारण गरीबों के अपने आशियानों को गंवाने का खतरा मडरा रहा है। कादीपुर थाने की पुलिस व राजस्व टीम के आगे बेबस नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार न्यायालय उपजिलाधिकारी के यहां इसरावती वर्मा द्वारा हदबरारी का मुकदमा दायर किया गया था। जिसमें तत्कालीन राजस्व निरीक्षक वर्तमान नायब तहसीलदार शीतला प्रसाद सिंह व वर्तमान राजस्व निरीक्षक राजित राम शर्मा द्वारा उक्त वाद में भिन्न भिन्न प्रकार से नक्शा नजरी मय आख्या प्रस्तुत की गयी है। आरोप है कि कानूनगो राजित राम शर्मा द्वारा मोतीलाल यादव,कांशीराम वर्मा आदि के शौचालय रिहायशी मकान,छप्पर आदि को अपनी आख्या में प्रदर्शित न कर मनमाने ढंग से सम्पूर्ण भूमि को खाली दिखाकर नक्शा नजरी मय आख्या सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत की गयी है। उपजिलाधिकारी ने विना स्थलीय निरीक्षण किये मनमाने ढंग से सरसरी तौर पर राजस्व निरीक्षक द्वारा प्रस्तुत नक्शा नजरी की पुष्टि करते हुए पत्थर नसब का आदेश पारित किया गया है। जिससे क्षुब्ध होकर विपक्षीगण द्वारा अपर आयुक्त अयोध्या के यहां निगरानी दाखिल की गयी।इसके बावजूद राजस्व निरीक्षक सुरेश तिवारी द्वारा निगरानी विचाराधीन रहते हुए पत्थर नसब की कार्यवाही की गयी। इसरावती व उनके पुत्र रामचेत वर्मा राजस्व निरीक्षक की आख्या को आधार मानकर कादीपुर थाने के प्रभारी निरीक्षक श्याम सुन्दर को हमवार कर कांशीराम वर्मा,मोतीलाल यादव,जगदीश,रामानन्द,रामानुज,राजाराम आदि के दरख्तानो को जेसीबी से नष्ट कराकर प्रार्थी को उनके मौरुसी आबादी व शौचालय व दरख्तानों को विनष्ट कर देना चाहते हैं।मौके पर प्रभारी निरीक्षक कादीपुर मय फोर्स की उपस्थिति में रामचेत वर्मा द्वारा दरख्तानो को नष्ट करने का कुत्सित प्रयास किया गया । किन्तु उपस्थित जन समर्थन के कारण प्रभारी निरीक्षक अपने मंसूबे में सफल नही हो सके। जिससे दोनों पक्षों में तनाव व्याप्त है।भविष्य में गरीबों को अपना आशियाना खोने का खतरा मंडरा रहा है।प्रशासनिक कर्मी कभी भी विवादित स्थल पर कब्जा दखल करा सकते हैं। सुल्तानपुर प्रशासन माननीय मुख्यमंत्री के जीरो टालरेंस नीति को खोखला साबित कर रहा हैं ।

