इलाहाबाद, 15 जुलाई 2025 —
उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व सांसद मोहम्मद आजम खान को 2016 के बलपूर्वक बेदखली प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक और राहत मिली है। आज न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आजम खान और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ अंतिम आदेश या फैसला देने पर लगी रोक को 28 जुलाई 2025 तक बढ़ा दिया।
सुनवाई के दौरान सह-आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नक़वी और अधिवक्ता सैयद अहमद फैज़ान ने पैरवी की, जबकि आजम खान और उनके सहयोगी वीरेंद्र गोयल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने प्रतिनिधित्व किया।
यह मुकदमा 2019 में रामपुर के कोतवाली थाने में दर्ज 12 एफआईआर (सं. 528/2019 से 539/2019 और 556/2019) पर आधारित है, जिन्हें 8 अगस्त 2024 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए), रामपुर द्वारा एकल वाद में समाहित किया गया था। इनमें डकैती, गृह में अनधिकृत प्रवेश और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने 30 मई 2025 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें मुख्य गवाह, विशेष रूप से सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन ज़फर अहमद फारूकी, की दोबारा गवाही और महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज को रिकॉर्ड में लाने की मांग को खारिज कर दिया गया था। उनका दावा है कि यह फुटेज उनकी घटनास्थल पर अनुपस्थिति साबित कर सकती है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि यह मुकदमा राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 का उल्लंघन करता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट 28 जुलाई तक कोई अंतिम फैसला नहीं सुना सकता। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है। मोहम्मद आजम खान, जो मो. अली जौहर विश्वविद्यालय के संस्थापक भी हैं, इस मामले में केंद्रीय भूमिका में हैं।
अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी, जिसमें निष्पक्ष सुनवाई और अभियोजन की वैधता पर गहन चर्चा होने की उम्मीद है।

