जौनपुर जिले के शाहगंज विधानसभा क्षेत्र से निषाद पार्टी के विधायक रमेश सिंह की कारगुजारी ने एक बार फिर सियासी हंगामा मचा दिया है। रविवार सुबह एक अल्पसंख्यक समुदाय के परिवार की जमीन पर विधायक की पत्नी नीलम सिंह के नाम एग्रीमेंट के बाद उनके गुर्गों ने जबरन कब्जा कर लिया। घटना शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के पटखौली पूरे आजम गांव की है, जहां 50 साल पुरानी बाउंड्री वॉल को जेसीबी से ढहा दिया गया। पीड़ित परिवार के घर लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए, ताकि कोई सबूत न बचे।
पीड़ित पक्ष ने सुबह ही शाहगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने उल्टा उन्हें ही थाने में दिनभर बिठाए रखा। इसी दौरान गुंडों ने महिलाओं को गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर कब्जा पूरा कर लिया। पीड़ितों का आरोप है कि विधायक के इशारे पर यह सब हुआ, जबकि योगी आदित्यनाथ सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती है। विपक्षी दलों ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या राजनीतिक दबाव के चलते न्याय प्रभावित हो रहा है? आखिरकार, पुलिस ने पीड़ित को ही चालान थमा दिया, जबकि असली अपराधी खुले घूम रहे हैं।
यह घटना विधायक रमेश सिंह की छवि पर दाग लगा रही है। पहले भी उन पर जमीन विवाद के आरोप लग चुके हैं, जैसे विश्वकर्मा समाज की जमीन पर कब्जे का मामला। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री कार्यालय से न्याय की गुहार लगाई है। क्या योगी सरकार अपने ही विधायक के खिलाफ कार्रवाई करेगी? या यह ‘माफिया राज’ का नया रूप है? जनता सवाल कर रही है कि गरीबों-अल्पसंख्यकों की जमीन पर कब्जा करने वाले दबंगों को संरक्षण मिलेगा या सजा?

