- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
भारत का संदेश “राष्ट्र प्रथम” आज देश की एकता और विकास की भावना को दर्शाता है। यह नारा केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक विचारधारा है जो हर भारतीय को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के लिए प्रेरित करता है। हाल के समाचारों में, इस संदेश को विभिन्न क्षेत्रों में लागू होते देखा जा सकता है। सरकार की नीतियों, जैसे आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया, ने इस भावना को और मजबूत किया है। उदाहरण के लिए, हाल ही में भारत ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी हथियारों के उत्पादन पर जोर दिया है, जिससे न केवल अर्थव्यवस्था को बल मिला, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति भी मजबूत हुई। इसके अलावा, सामाजिक और सांस्कृतिक पहल, जैसे स्वच्छ भारत अभियान और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण, “राष्ट्र प्रथम” की भावना को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। यह संदेश युवाओं को भी प्रेरित कर रहा है, जो डिजिटल मंचों पर राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा दे रहे हैं।
आर्टिकल 370 हटाने के बाद कश्मीर की बदलती स्थिति
5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। इस निर्णय ने कश्मीर को भारत के अन्य हिस्सों के साथ और अधिक एकीकृत करने का मार्ग प्रशस्त किया। हाल के समाचारों के अनुसार, कश्मीर में विकास परियोजनाओं में तेजी आई है, जिसमें सड़क, रेल और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में बड़े निवेश शामिल हैं। उदाहरण के लिए, श्रीनगर और जम्मू को जोड़ने वाली रेल परियोजनाएं तेजी से पूरी हो रही हैं, जिससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ रही है। इसके अलावा, शिक्षा और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि हुई है। सरकार ने स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिससे बेरोजगारी में कमी आई है। हालांकि, कुछ चुनौतियां जैसे स्थानीय असंतोष और सुरक्षा मुद्दे अभी भी बने हुए हैं, लेकिन सरकार इनसे निपटने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

राष्ट्र प्रथम और कश्मीर का एकीकरण
“राष्ट्र प्रथम” का संदेश कश्मीर के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आर्टिकल 370 के हटने के बाद क्षेत्र का भारत के साथ एकीकरण और मजबूत हुआ है। केंद्र सरकार ने कश्मीर को मुख्यधारा में लाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जैसे पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है। साथ ही, “राष्ट्र प्रथम” की भावना को बढ़ावा देने के लिए सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो स्थानीय लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना को प्रबल कर रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग अभी भी इस बदलाव को पूरी तरह स्वीकार करने में संकोच कर रहे हैं, लेकिन सरकार और नागरिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से कश्मीर में शांति और समृद्धि की दिशा में प्रगति हो रही है।

