भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हाल के महीनों में चरम पर पहुंच गया है, विशेष रूप से पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकांश भारतीय पर्यटक थे। इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए। 22 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भारत ने 22 मिनट में आतंकियों के नौ सबसे बड़े ठिकानों को नष्ट कर दिया। इस ऑपरेशन के बाद भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजा। 26 मई 2025 को यह प्रतिनिधिमंडल, जिसमें भाजपा सांसद बैजयंत पांडा और तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी शामिल थे, फ्रांस, कतर, और कुवैत पहुंचा। इस कदम का उद्देश्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को विश्व समुदाय के सामने प्रस्तुत करना था।
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के युद्धविराम प्रस्ताव पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत हमले का जवाब देगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने इन हमलों का जवाब देने की धमकी दी है, जिससे दक्षिण एशिया में तनाव और बढ़ गया है। यह प्रतिनिधिमंडल 22 मई से शुरू हुए 10-दिवसीय दौरे पर अमेरिका, यूके, दक्षिण अफ्रीका, कतर, और यूएई जैसे देशों में भारत का पक्ष रख रहा है। भारत ने सिंधु जल समझौते को भी निलंबित कर दिया है और अटारी चेक पोस्ट को पूरी तरह बंद कर दिया है। यह स्थिति क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन रही है।

