आजमगढ़: शहर के जाने माने साहित्यकार जगदीश बरनवाल कुंद के आवास पर भोजपुरी कवि श्री श्रीकृष्ण घायल के आगमन के उपलक्ष्य में एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया।वर्तमान समय में घायल “आजमगढ़ मण्डल के भोजपुरी रचनाकार” विषय पर कार्य कर रहे हैं। इस सन्दर्भ में कुंद एवं उनके बीच हो रही चर्चा के दौरान जनपद के अन्य प्रमुख साहित्यकार सर्वश्री बैजनाथ गॅवार, राजनाथ राज, बिन्द्रा यादव, श्रीमती गीता यादव (पत्नी श्री बिन्द्रा यादव) एवं डॉ ईश्वरचंद्र त्रिपाठी का आगमन होने से गोष्ठी की उपयोगिता बढ़ गई और स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या को इन प्रमुख कवियो की उपस्थिति ने गरिमा प्रदान कर दी। गोष्ठी के संचालन का दायित्व श्री घायल जी ने निभाया।सर्वप्रथम श्री बिन्द्रा यादव ने भोजपुरी सवैया छन्द में “का करबा कंजूसी क के सब कुछ इहवाॅ संयोग के हाथे।का कइलीं ककही ले के राज, न राज लिखल जो भरत जी के माथे। धन के ललची भहभारत में, सब भाई मरा गये भाई के हाथे। सोने क लालच कइलीं सिया, छुटि गइल पिया गयि रावन साथे।” सुना कर लालच की ओर उन्मुख न होने का संकेत किया। प्रखर कविमंच संचालक एवं प्रख्यात गजलकार डॉ ईश्वरचंद्र त्रिपाठी ने “कभी खडे जमीन पर तो आसमां में पाॅव था। ये जिन्दगी का मशवरा ये उम्र का सुझाव था।कोई जो मुझसे पूछे तो यही बता सकूँगा मैं।अजीब ये दयार था अजीब ये पडाव था।” सुना कर सरस अनुभूति का बोध कराया।
प्रमुख प्रगतिशील भोजपुरी कवि श्री बैजनाथ गॅवार ने “चाहे माना न माना तोहार मरजी। सोझहीं कइ दा बहाना तोहार मरजी।अगर चाहा त हम तोहरे दिल में रहीं। या करा बेठिकाना तोहार मरजी।” के माध्यम से अपने मन की बात सुनाई। गीतकार श्री राजनाथ राज ने “चलो फिर से उजडा घरौंदा बसायें, तिनका तिनका चलो चुन के लायें” सुना कर नये सुव्यवस्थित निर्माण का आह्वान किया।
संचालक श्री श्रीकृष्ण घायल ने “कइसे कइसे पार करेली जीवन सरिता, कइसे चलें थहावत पानी। जय हो जय किसान के रानी।” सुना कर गोष्ठी को ऊॅचाई पर पहुँचाया।
गोष्ठी के मेजबान कुंद जी ने अपनी एक कविता “स्वतन्त्रता की बलि वेदी पर मिटने वालों बोलो तो, क्या स्वप्न तुम्हारा सत्य हुआ?” सुना कर उन स्वातन्त्र्यवीरों की व्यथा को व्यक्त किया जिन्होंने आजादी मिलने पर सुख शांति की अपेक्षा की थी।
भोजपुरी कवि श्रीकृष्ण घायल के सम्मान में काव्य गोष्ठी
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