महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता अजीत पवार का बुधवार सुबह एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया। यह हादसा पुणे जिले के बारामती में हुआ, जहां उनका चार्टर्ड विमान (Learjet 45) मुंबई से बारामती की ओर जा रहा था। लैंडिंग के दौरान विमान ने रनवे से फिसलकर क्रैश कर दिया और आग की लपटों में घिर गया। विमान में अजीत पवार के अलावा उनका पीएसओ, एक अटेंडेंट और दो पायलट सवार थे—कुल पांच लोग, जिनमें से कोई भी जीवित नहीं बचा। डीजीसीए ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। हादसे के बाद घटनास्थल पर काला धुआं उठता दिखा और मलबे से आग की लपटें निकल रही थीं। अजीत पवार 66 वर्ष के थे और महाराष्ट्र की राजनीति में ‘दादा’ के नाम से प्रसिद्ध थे। वे जिला परिषद चुनावों के प्रचार के लिए जा रहे थे, जहां उन्हें चार जनसभाओं को संबोधित करना था।
यह घटना महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अजीत पवार पवार परिवार के प्रमुख स्तंभ थे और बारामती को अपना मजबूत गढ़ बनाए रखा था। उन्होंने 1991 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता और कई बार विधायक रहते हुए उपमुख्यमंत्री पद संभाला। 2023 में एनसीपी से अलग होकर उन्होंने अपनी धारा बनाई और महायुति सरकार में शामिल हुए, जहां चुनाव आयोग ने उन्हें पार्टी का नाम और चिन्ह दिया। वे प्रशासनिक कुशलता, सहकारी क्षेत्र में योगदान और गरीबों-किसानों के लिए योजनाओं के लिए जाने जाते थे। हादसे की खबर फैलते ही एनसीपी कार्यालयों, बारामती और पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थक ‘दादा’ कहकर रो पड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘असमय और चौंकाने वाली’ घटना बताया, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एकनाथ शिंदे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, ममता बनर्जी सहित कई नेताओं ने गहरा शोक जताया। महाराष्ट्र सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। परिवार के सदस्य सुनेत्रा पवार, सुप्रिया सुले और शरद पवार बारामती पहुंच चुके हैं।
अजीत पवार की मृत्यु से महाराष्ट्र में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है। बारामती और पश्चिमी महाराष्ट्र में उनकी गहरी पकड़ थी, जहां वे विकास कार्यों और जनसेवा के लिए याद किए जाते थे। जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की जांच कर रही हैं, जिसमें तकनीकी खराबी, मौसम या पायलट की मेयडे कॉल जैसी बातें सामने आ रही हैं। हाल ही में एनसीपी के दोनों गुटों में एकता की संभावनाएं बढ़ रही थीं, लेकिन यह हादसा सब कुछ बदल गया। लाखों समर्थक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनकी कमी से सहकारी, ग्रामीण विकास और महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा नुकसान पहुंचा है।

