ओमकार त्रिपाठी
मुंबई, वह शहर जो कभी नहीं सोता, एक बार फिर अपनी सुरक्षा तैयारियों को परखने के लिए तैयार है। 7 मई 2025 को शाम 4 बजे, मुंबई में एक बड़े पैमाने पर मॉक ड्रिल का आयोजन होने जा रहा है। यह अभ्यास न केवल शहर की आपातकालीन सेवाओं की ताकत को जांचेगा, बल्कि आम नागरिकों में भी जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ाएगा।
क्या है यह मॉक ड्रिल?
मॉक ड्रिल एक नकली अभ्यास होता है, जिसका उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति—जैसे आतंकी हमला, आग, भूकंप या अन्य संकटों—के लिए तैयारियों को परखना है। इस बार की ड्रिल केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश पर आयोजित हो रही है।
यह अभ्यास विशेष रूप से 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद डिज़ाइन किया गया है, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।
‘ऑपरेशन अभ्यास’ के तहत मुंबई की तैयारी
मुंबई में यह ड्रिल ‘ऑपरेशन अभ्यास’ का हिस्सा है, जिसमें हवाई हमले की स्थिति का अनुकरण किया जाएगा। इस दौरान:
60 सायरन बजाए जाएंगे
ब्लैकआउट (बिजली कटौती) की स्थिति बनाई जाएगी
नागरिकों को सुरक्षा अभ्यास में शामिल किया जाएगा
कब, कहां और कैसे होगा यह मॉक ड्रिल?
तारीख और समय: 7 मई 2025, शाम 4:00 बजे से 4:30 बजे तक
स्थान: मुंबई के विभिन्न हिस्सों में, विशेष रूप से रेलवे स्टेशन, मॉल, सरकारी कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर
भागीदारी: पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स और स्थानीय प्रशासन
परिदृश्य: हवाई हमले का अनुकरण, नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाना, उपकरण बंद करना और निर्देशों का पालन करना।
सायरन की भूमिका क्या होगी?
शाम 4 बजे: दो मिनट तक खतरे की चेतावनी देने वाला सायरन बजेगा
स्थिति सामान्य होने पर: छोटे सायरन बजेंगे
इस मॉक ड्रिल का उद्देश्य
आपातकालीन तैयारियों की जांच: नियंत्रण कक्ष, चेतावनी प्रणाली, और वायुसेना से संचार
नागरिक प्रशिक्षण: स्कूलों, कॉलेजों, और जनता को प्राथमिक चिकित्सा, निकासी और मानसिक संतुलन की ट्रेनिंग
ब्लैकआउट व छलावरण: बिजली कटौती और महत्वपूर्ण भवनों को छिपाने की व्यवस्था
नए खतरों का सामना: हालिया आतंकी हमलों के अनुसार रणनीति बनाना
मुंबई के लिए यह मॉक ड्रिल क्यों खास है?
मुंबई, जो भारत की आर्थिक राजधानी है, पहले भी 26/11 जैसे बड़े आतंकी हमलों का सामना कर चुकी है। इस वजह से:
तेज प्रतिक्रिया: पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की तैयारी जांची जाएगी
नागरिक जागरूकता: आम लोग सीखेंगे कि आपात स्थिति में क्या करना चाहिए
संवेदनशील क्षेत्र: रेलवे स्टेशन, पोर्ट्स, कॉर्पोरेट हब आदि की सुरक्षा की समीक्षा
नागरिकों के लिए जरूरी सलाह
घबराएं नहीं: यह सिर्फ एक अभ्यास है
तैयार रहें: टॉर्च, मोमबत्ती, फर्स्ट ऐड किट और नकदी साथ रखें
सत्यापन करें: केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें, अफवाहों से बचें
सहयोग करें: ड्रिल में भाग लें और दूसरों को भी प्रेरित करें
परीक्षाएं प्रभावित नहीं होंगी
मुंबई विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि 7 मई को सभी परीक्षाएं निर्धारित समय पर ही होंगी। छात्रों को डरने की आवश्यकता नहीं है।
क्यों जरूरी है यह मॉक ड्रिल?
1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर सिविल डिफेंस ड्रिल हो रही है। यह अभ्यास हमें सिखाता है कि पहले से तैयारी ही सबसे बड़ा हथियार है। इससे न केवल सरकारी एजेंसियों को खुद को बेहतर करने का मौका मिलेगा, बल्कि नागरिकों को भी विश्वास मिलेगा कि उनका शहर तैयार है।

