डाक विभाग की रजिस्ट्री सेवा बंद कर कुरियर कंपनियों को फायदा पहुंचा रही सरकार–अजय राय
- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से ठीक पहले भारतीय डाकघर की रजिस्ट्री सेवा बंद होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह महज तकनीकी खराबी है? क्या सरकार का यह कदम निजी कूरियर कंपनियों को फायदा पहुंचाने की रणनीति है? क्या रक्षाबंधन के समय ऐसा निर्णय लेना उचित है, जब की देश भर में करीब 10 करोड़ बहने अपने भाइयों को रजिस्ट्री के जरिए राखी भेजती हैं?
9 अगस्त को रक्षा बंधन है और 1 अगस्त से भारतीय डाकघर में रजिस्ट्री सेवा बंद है क्या यह सोची समझी साजिश की तरफ इशारा नहीं कर रही है ?। डाक विभाग ने इसका कारण सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी बताया है, जिसे ठीक करने में समय लगेगा। रजिस्ट्री के जरिए राखी भेजने का खर्च 22 महज रुपये होता है, जो आम लोगों के लिए किफायती है। लेकिन सेवा बंद होने से लोग निजी कूरियर कंपनियों का सहारा लेने को मजबूर हैं, जिनका औसत खर्च 200- रुपये है। अनुमान है कि इससे डाक विभाग का बड़ा राजस्व घाटा हो कर निजी कंपनियों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का मुनाफा हो सकता है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “यह एक सोची समझी साजिश है, जिसके तहत निजी कूरियर कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए डाकघर के सॉफ्टवेयर को जानबूझकर क्षतिग्रस्त किया गया है। इससे बहनों को राखी भेजने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।” राय ने आगे कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में रक्षाबंधन के अवसर पर भारतीय डाक सेवा विशेष छूट और सुविधाएं प्रदान करती थी। उन्होंने इस मामले में विशेष जांच की मांग की, ताकि “मोदी सरकार की गुजराती कूरियर कंपनियों को लाभ पहुंचाने की साजिश का पर्दाफाश हो सके। राय ने आगे कहा”यह स्थिति आम लोगों के लिए आर्थिक और भावनात्मक परेशानी का कारण बन रही है। सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे और डाक सेवाओं को सुचारू बनाए,

