जिला पंचायत के अधिकारियों की मदद से अजय सिंह 17 बीघे का नक्शा पास करवा कर 175 बीघा जमीन पर कर रहा है प्लाटिंग ।
जिलाधिकारी मंडलायुक्त से लेकर सचिवालय मंत्रालय के सभी अधिकारी अंजान है या दे रहे हैं मौन समर्थन।
ओमकार त्रिपाठी।
लखनऊ। राज्य मुख्यालय लखनऊ के मोहल्लालगंज क्षेत्र में जिला पंचायत और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से आम जनता को बड़ा नुकसान पहुँचाया जा रहा है । जिला पंचायत द्वारा मातृभूमि कंपनी के मालिक अजय सिंह के नाम पर सिर्फ 17 बीघे जमीन को प्लानिंग नक्शा की अनुमति दी गई है जब की मातृभूमि कंपनी और अजय सिंह 150 बीघे से अधिक जमीन को अपने दायरे में रख कर अवैध तरीके से प्लॉटिंग करते हुए बिक्री कर रहे है, यह स्पष्ट तौर पर सरकारी नियमों का उल्लंघन और निवेशकों के साथ धोखा है। खून पसीने की कमाई से आशियाना बनाने की चाहत रखने वाले निवेशकों के साथ धोखा किया जा रहा है जिससे वह विचारे अनभिज्ञ है। उक्त मामले का खुलासा करते हुए पूर्व में एक अखबार द्वारा प्रकाशित खबर में हो चुका है, प्रकाशित खबर के अनुसार अनुसार, रियल एस्टेट कंपनी मातृभूमि ने निर्धारित भूमि से कई गुना ज्यादा क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग कर दी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच दल गठित करने की औपचारिकता भी पूरी कर दी लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।स्थानीय लोगों का प्रश्न है कि जाँच शुरू हुई या नहीं सिर्फ कागजों तक ही सीमित है इसकी कोई जानकारी जिला पंचायत द्वारा नहीं दी जा रही है,क्यों कि अवैध प्लॉटिंग का कार्य लगातार जारी है और स्थानीय लोगों की शिकायतों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। स्थानीय समाज सेवक सुनील बंसल द्वारा अखंड राष्ट्र को बताया गया कि लखनऊ क्षेत्र के 477 गांव का नक्शा पास करने का अधिकार जिला पंचायत के पास है, लखनऊ जिले के अधिकारियों की नजरों के सामने इस प्रकार की जालसाजी कई जगहों पर हो रही है, जिसमें शासन के नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। आमजन अपने हक और न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है, मगर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत ने उन्हें असहाय बना दिया है। बंसल के अनुसार मातृ भूमि कंपनी के मालिक अजय सिंह का शासन प्रशासन में गहरे संबंध है जीसके कारण कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। गौर तलब हो पूर्व में भी अंशल जैसी कई कंपनियों द्वारा इसी तरह का जालसाजी किया जा चुका है बावजूद इस प्रकार के कार्य में कोई कमी नही आई।
कुछ अखबारों ने इस मामले में पहले भी खबर छापकर जिले में प्रशासन को सतर्क कर अपनी जिम्मेदारियां निभाई परन्तु हकीकत यह है कि जमीन से जुड़े मसलों में भ्रष्टाचार और अनुचित प्लॉटिंग आज भी जारी है। जनता को उम्मीद थी कि प्रशासन सख्त कदम उठाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई बदलाव नहीं दिखा है। और लोगों को अब भी योगी सरकार की भू माफियाओं के विरुद्ध होने वाली कार्यवाही पर भरोसा है।

