–ओमकार त्रिपाठी
लखनऊ, 23 मई 2025: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के भिठौली ओवरब्रिज, जो सितापुर रोड हाईवे के पास स्थित है, पर बीती रात 11:06 बजे एक गंभीर घटना ने पूरे शहर का ध्यान खींचा है। इस घटना में कुछ युवक हाईवे के बीच में लाइट स्टैंड और सेटअप लगाकर सोशल मीडिया के लिए रील बना रहे थे, जिसके दौरान अभिनव गुप्ता और शुभम गुप्ता ने इस गतिविधि को देखा और इसे रिकॉर्ड कर लिया। इस घटना ने न केवल सड़क सुरक्षा के प्रति लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि प्रशासन, पुलिस और मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, भिठौली ओवरब्रिज पर कुछ युवक देर रात हाईवे के बीच में रील बनाने में व्यस्त थे। उन्होंने लाइट स्टैंड, कैमरे और अन्य उपकरण सड़क पर रखे थे, जिससे यातायात बाधित हो रहा था। इस दौरान अभिनव गुप्ता और शुभम गुप्ता, जो संभवतः उसी रास्ते से गुजर रहे थे, ने इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत को न केवल देखा, बल्कि अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी कर लिया। उनकी इस रिकॉर्डिंग ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया और इस घटना ने तुरंत वायरल होने की राह पकड़ ली।
यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह से सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता और रील बनाने की होड़ में युवा अपनी और दूसरों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। भिठौली ओवरब्रिज, जो पहले से ही अपनी संकरी सड़क और भारी ट्रैफिक के लिए जाना जाता है, पर इस तरह की गतिविधि न केवल खतरनाक है, बल्कि आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में भी आती है।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस घटना के बाद पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सितापुर रोड हाईवे, जो लखनऊ के प्रमुख मार्गों में से एक है, पर इतनी रात गए इस तरह की गतिविधि कैसे संभव हो सकी? क्या पुलिस गश्त की कमी थी, या फिर प्रशासन ने इस क्षेत्र में निगरानी के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए? स्थानीय लोगों का कहना है कि भिठौली ओवरब्रिज और आसपास के इलाकों में अक्सर रात के समय अवैध गतिविधियां होती हैं, लेकिन पुलिस की मौजूदगी न के बराबर होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई रिकॉर्डिंग में साफ दिख रहा है कि रील बनाने वाले युवकों ने न तो ट्रैफिक नियमों का पालन किया और न ही सड़क पर चलने वाले अन्य वाहनों की सुरक्षा का ध्यान रखा। अभिनव और शुभम की इस रिकॉर्डिंग ने न केवल इस लापरवाही को उजागर किया, बल्कि यह भी सवाल उठाया कि क्या प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर है?
मंत्रियों और सरकार पर निशाना
इस घटना ने न केवल पुलिस और प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित मंत्रियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, जो सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, इस तरह की गतिविधियों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे, नियमित पुलिस गश्त और सख्त नियम लागू किए जाते, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था।
स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की जाए। साथ ही, सितापुर रोड और अन्य प्रमुख हाईवे पर निगरानी बढ़ाने और रात के समय गश्त को और सख्त करने की जरूरत है। कुछ लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि सोशल मीडिया रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि युवा ऐसी खतरनाक गतिविधियों से बचें।
सड़क सुरक्षा और जागरूकता की जरूरत
यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी को दर्शाती है। हाल के वर्षों में, उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवाते हैं, और इनमें से कई हादसे मानवीय लापरवाही के कारण होते हैं। भिठौली ओवरब्रिज की यह घटना भी इसी लापरवाही का एक उदाहरण है।
आगे क्या?
पुलिस ने इस घटना के बाद कार्रवाई शुरू कर दी है और रील बनाने वाले युवकों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। अभिनव गुप्ता और शुभम गुप्ता की रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अभी तक कोई आधिकारिक बयान पुलिस की ओर से नहीं आया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर लोगों में गुस्सा है और वे प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक चेतावनी है कि सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार व्यवहार को बढ़ावा देना कितना जरूरी है। सरकार, पुलिस और समाज को मिलकर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।
अंत में, यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि सोशल मीडिया की चमक-दमक के पीछे हम अपनी और दूसरों की सुरक्षा को कितना जोखिम में डाल रहे हैं। यह समय है कि हम जागरूक हों और ऐसी लापरवाही को रोकने के लिए कदम उठाएं।

