- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
11 जून 2025 को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का 78वां जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है। पटना में उनके आवास पर 78 किलो का लड्डू केक काटा गया, जिसमें समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ शामिल हुई। बिहार भर में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने इसे ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाया, जिसमें सामुदायिक भोज और रैलियों का आयोजन किया गया। कई बड़े नेताओं, जैसे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर बधाई दी।
लालू यादव का जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज में एक साधारण परिवार में हुआ था। पढ़ाई में उत्कृष्ट, उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय से स्नातक और कानून की डिग्री हासिल की। शुरू में एक क्लर्क के रूप में काम करने वाले लालू ने 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा। 1977 में, मात्र 29 साल की उम्र में, वे जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा सांसद बने।
1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू ने सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान पर जोर दिया, जिसने उन्हें ‘मसीहा’ की छवि दी। उनके शासनकाल में रेलवे मंत्री के रूप में भी उन्होंने सुधार किए, जिसकी सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हुई। हालांकि, चारा घोटाले जैसे विवादों ने उनके करियर को प्रभावित किया। हाल ही में ‘नौकरी के बदले जमीन’ मामले में सीबीआई और ईडी की जांच ने उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
लालू की निजी जिंदगी भी चर्चा में रही। उनके दो बेटों, तेज प्रताप और तेजस्वी, और सात बेटियों में से मीसा भारती और रोहिणी आचार्य राजनीति में सक्रिय हैं। हाल ही में तेज प्रताप को निजी विवादों के कारण पार्टी और परिवार से निष्कासित किया गया, जिसने आरजेडी की छवि को प्रभावित किया।
आलोचकों का कहना है कि लालू के शासन में बिहार में उद्योगों का पलायन हुआ, जबकि समर्थक उन्हें सामाजिक समावेश का प्रतीक मानते हैं। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, लालू का स्वास्थ्य और कानूनी मुश्किलें चर्चा में हैं, लेकिन उनका करिश्मा और जनाधार बरकरार है।

