सुल्तानपुर। जनपद में विद्युत विभाग के भीतर भ्रष्टाचार एक बार फिर सुर्खियों में है। उपखण्ड अधिकारी सुनील कुमार और अवर अभियंता आनंद प्रकाश जायसवाल पर आरोप है कि उन्होंने राजस्व हानि के मामले में लिप्त निविदा कर्मी मोहम्मद गुफरान, उसके भाई सदाम, और उनके सहयोगी शमशेर की नियुक्ति के लिए अनुशंसा भेजी है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार ये कर्मी पूर्व में टर्मिनेट किए जा चुके हैं।
इस बीच, कई निर्दोष निविदा कर्मियों को जबरन कार्य से रोकने की भी बातें सामने आ रही हैं, जबकि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक द्वारा ऐसा कोई आदेश अब तक पारित नहीं किया गया है। निविदा कर्मियों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्ट कर्मियों को पुनः नियुक्त किया जा रहा है, वहीं ईमानदार कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
संविदा कर्मचारी संघ के जिला महामंत्री अजय चौरसिया ने इस पूरे प्रकरण पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि –
> “अवर अभियंता को फर्जी तरीके से निलंबित किया गया है, और अब निर्दोष निविदा कर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जिन परिसरों पर विद्युत चोरी पकड़ी गई है, वहाँ विभाग की बिजलेंश टीम की संलिप्तता कैमरे में कैद हुई है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं कुछ मामलों में बिजली विभाग के बाबू नासिर अब्बास जैदी के रिश्तेदारों की दुकानों पर चोरी पाई गई, लेकिन विभाग ने इसे भी दबा दिया।
अजय चौरसिया ने चेतावनी दी है कि यदि निर्दोष निविदा कर्मियों के विरुद्ध कोई अनुचित कार्यवाही की जाती है, तो संगठन उसका कड़ा विरोध करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकारियों को शक है कि किसी निविदा कर्मी की संलिप्तता है, तो एक निष्पक्ष जांच समिति गठित की जाए, जिसमें कार्यदायी संस्था और संगठन के प्रतिनिधि शामिल हों। जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो संगठन कार्यवाही का समर्थन करेगा। परंतु, बेकसूरों को बलि का बकरा बनाने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे राजस्व घोटाले में शामिल तीन निविदा कर्मियों की नियुक्ति का भी कड़ा विरोध करेंगे।

