अल्पसंख्यक की जमीन पर अवैध कब्जा करने का मामला
जौनपुर। शाहगंज में एक अल्पसंख्यक की जमीन पर जबरन अवैध कब्जा करने का मामला ठंडा होता दिख नहीं रहा है। पुलिस द्वारा स्थानीय भाजपा विधायक को मिल रहे खुला संरक्षण को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर न्याय की गुहार की है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को लेकर नाराज दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार 18 सितंबर को जिला मुख्यालय पर दिशा की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें जनपद के सांसद, विधायक, एमएलसी, ब्लॉक प्रमुख समेत जिले के सभी अधिकारी मौजूद थे। बैठक चल ही रही थी कि दोपहर में 1 बजे मुख्यमंत्री आवास से विधायक रमेश सिंह को फोन पर तत्काल मुख्यमंत्री के समक्ष उपस्थित होने का आदेश मिला। बैठक को बीच में ही छोड़कर विधायक रमेश सिंह लखनऊ के लिए निकल गए। सूत्रों के मिली जानकारी में यह पता चला कि शाहगंज अवैध कब्जा मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने विधायक रमेश सिंह को काफी खरी खोटी सुनाते हुए दोबारा इस तरह की हरकत न करने की हिदायत दी। योगी दरबार में उपस्थित होने की बात पर पर्दा डालते हुए रमेश सिंह ने पट्टी नरेंद्रपुर से सराय मोहिउद्दीनपुर मार्ग के निर्माण संबंधी पुरानी फोटो डालकर अखबार में सुर्खियां बटोरने और जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास किया।
सत्ताधारी विधायक द्वारा अवैध तरीके से जमीन कब्जा मामले में नया और रोचक मोड़ तब आ गया जब पुलिस द्वारा सात लोगों के विरुद्ध स्वयं वादी बन कर सामान्य धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया जबकि घटना में प्रयुक्त जेसीबी और ट्रैक्टर के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया है
जिस दिन कब्जा हुआ है और पुरानी बाउंड्री वाल तोड़ी गई उसका जिक्र तहरीर में दर्ज नहीं है। दिवाल बनाने की बात को लेकर कहासुनी की बात तहरीर में है, लेकिन दिवाल बनाई गई, नहीं लिखा गया है। जिस दिन दीवार बनाई गई 14 सितंबर उस दिन डायल 112 द्वारा वीडियो क्यों नहीं बनाया गया और उसी मुकदमा पंजीकृत क्यों नहीं किया गया? जबकि 15 सितंबर से ही प्रथम पक्ष द्वारा तहरीर दी गई है, उसका मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया?पीड़ित द्वारा 18 सितंबर को सीओ शाहगंज के ऊपर गंभीर आरोप लगाया गया कि विधायक और उनकी पत्नी का नाम निकाल कर तहरीर बदलने के लिए दबाव बनाया गया है। और शाम को डायल 112 की सूचना के आधार पर मुकदमा दर्ज कराती है।
ऐसी क्या मजबूरी थी जो पीड़ित द्वारा दिए गए तहरीर को दरकिनार कर पुलिस को स्वयं वादी बन कर मुकदमा पंजीकृत करना पड़ा।
आरोप है कि पीड़ित की जमीन को आरोपी फैजान ने गलत तरीके से रजिस्ट्री कराई, जिसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है. उसी विवादित जमीन को बीजेपी विधायक ने अपनी पत्नी नीलम सिंह के नाम एग्रीमेंट कराकर उसे पुलिस और अपने करीबियों की शह पर बलपूर्वक कब्जा करा लिया
पीड़ित अकबर काजमी का आरोप है कि विधायक रमेश सिंह के प्रभाव में दिनदहाड़े पुलिस की शह पर उसकी जमीन कब्जा किए जाने के बाद भी जौनपुर जिले का कोई अधिकारी उसकी सुनवाई नहीं कर रहा है. ऐसे में उसका पूरा परिवार डरा सहमा हुआ है।
फर्जीवाड़े का आरोप
पीड़ित ने आरोप लगाया कि वर्ष 1985 में उनके पिता मंजूर अहमद काजमी ने कौड़ियां, शाहगंज निवासी दो सगे भाई अब्दुल और अमीन से जमीन रजिस्ट्री कराई थी. इसी जमीन को 27 सितंबर 2024 को अब्दुल और अमीन के परिवार के लोगों ने फैजान को रजिस्ट्री कर दी. इसी को लेकर न्यायालय में मुकदमा हो गया. विवादित जमीन फैजान के नाम खतौनी में दर्ज भी नहीं हुई थी. इसके बावजूद न्यायालय में विचाराधीन इसी विवादित जमीन को फैजान ने शाहगंज के निषाद पार्टी के विधायक रमेश सिंह की पत्नी व जिला पंचायत सदस्य नीलम सिंह के नाम 19 अप्रैल 2025 को रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कर दिया. इसके बाद 14 सितंबर को इसी जमीन को बलपूवर्क कब्जा करा लिया गया.
पीड़ित को थाने में बैठाकर कर लिया गया कब्जा
पीड़ित का आरोप है कि शाहगंज विधायक के निर्देश पर उनकी पत्नी नीलम सिंह के नाम एग्रीमेंट हुई विवादित जमीन पर कब्जा कराने के लिए स्थानीय प्रशासन ने आरोपियों का पूरा साथ दिया. आरोप है कि विधायक के करीब 2 दर्जन लोग वहां जेसीब, ट्रैक्टर लेकर पहुंचे और फिर बाउंड्री वॉल तोड़ दी गई. उसके साथ मारपीट की. पीड़ित की मानें तो उसे सुबह से ले जाकर शाम तक थाने में बिठाकर रखा गया.
घर में लगे CCTV कैमरे तोड़े गए
पीड़ित का आरोप है कि जमीन को कब्जाने में स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग रहा. अपनी करतूत को छिपाने के लिए पीड़ित के घर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़े गए. आरोप है कि पत्नी के नाम एग्रीमेंट हुई विवादित जमीन पर कब्जा कराने के बाद विधायक रमेश सिंह लखनऊ निकल गए. इसके बाद पुलिस ने अपने बचाव के लिए पीड़ित और उसके भाइयों के साथ ही विधायक पक्ष से फैजान समेत चार लोगों के खिलाफ भी बीएनएस 170 के तहत शांतिभंग में चालान करके खानापूर्ति कर ली. पीड़ित और उसके दो भाइयों को पुलिस ने सुबह से शाम तक थाने में बैठाए रखा.
CCTV में कैद हुई घटना
हालांकि पीड़ित के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे में जेसीबी से बाउंड्री वॉल तोड़ते हुए देखा गया. बाउंड्री तोड़ने के बाद जब पीड़ित विरोध करने गया तो विधायक के करीबियों ने उसके साथ मारपीट की. बिना किसी सूचना के तत्काल पुलिस भी पहुंच गई. पीड़ित और उसके भाइयों को लेकर थाने चली गई. सीसीटीवी में पुलिस के पहुंचने का समय यह बता रहा है कि पुलिस इसके लिए वहां पहले से तैयार खड़ी थी. इतना ही नहीं जमीन कब्जा करने गए दो युवक सीसीटीवी कैमरे को भी तोड़ते कैद हुए हैं।

