एटा | कलयुग में भी श्रद्धा, सेवा और संस्कारों की मिसालें कायम हैं। एटा जनपद में श्रावण मास के तीसरे सोमवार को ऐसा ही एक दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। दूल्हापुर निवासी एक संयुक्त परिवार ने अपने 80 वर्षीय दादा-दादी को सोरों में गंगा स्नान कराकर डोली में बैठाया और फिर पैदल यात्रा करते हुए एटा स्थित अपने गांव तक ले आए।
इस सेवा भाव से भरी यात्रा में परिवार के पांच बेटे, बहुएं, नाती-पोते और छोटे-छोटे बच्चे तक शामिल रहे। परिजन सोमपाल पुत्र राजवीर सिंह ने बताया कि “यह पुण्य का अवसर हमें नहीं, हमारे बुजुर्गों को समर्पित है। उनकी सेवा ही हमारे लिए सबसे बड़ी भक्ति है।”
परिवार के सदस्य सुबह 6 बजे सोरों जी से कांवर लेकर रवाना हुए थे और यात्रा के दौरान पूरे रास्ते बुजुर्गों के लिए डोली का विशेष प्रबंध किया गया। सोमपाल ने बताया कि उनके चाचा श्याम बाबू और धर्मेंद्र कुमार भी कांवर यात्रा में साथ हैं और कुल मिलाकर 15 सदस्य इस सेवा और भक्ति से ओतप्रोत यात्रा में सहभागी हैं।
इस भावनात्मक और प्रेरणादायक दृश्य को देखने के लिए राहगीरों और स्थानीय लोगों की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने इसे आधुनिक समय का ‘श्रवण कुमार’ का उदाहरण बताया और कहा कि ऐसे दृश्य विरले ही देखने को मिलते हैं, जो आज के समाज में सेवा और संस्कारों की प्रासंगिकता को दर्शाते हैं।
यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि पारिवारिक मूल्यों, बुजुर्गों के प्रति कृतज्ञता और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण भी बनी।

