–प्रशांत त्रिपाठी
उन्नाव: जनपद के नाम पर अब ‘कुर्बानी के कारोबार’ की बदबू ने ऐसा कब्ज़ा कर लिया है कि जनता की सांसें भी बोझ बन गई हैं, लेकिन अफसरों और नेताओं के नकद खज़ाने दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से भरते जा रहे हैं। जिले भर में फैले अवैध स्लॉटर हाउस अब सिर्फ जानवरों की हत्या नहीं कर रहे, बल्कि इंसानी सेहत, पशु कानून, प्रकृति और नैतिकता की भी सामूहिक हत्या कर रहे हैं। हालत यह है कि स्लॉटर हाउस से निकलने वाला खून और अपशिष्ट बिना ट्रीटमेंट के खेतों, नालों और भूगर्भ जल में मिल रहा है, हैंडपंपों से बदबूदार, काला और जहरीला पानी निकल रहा है, जिससे बच्चे बीमार, बूढ़े बदहाल और महिलाएं असमय बीमारियों का शिकार हो रही हैं, लेकिन जिला प्रशासन आंखों में पट्टी बांधे मलाई काट रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पशुपालन, खाद्य सुरक्षा और पुलिस प्रशासन जैसे विभागों में भ्रष्टाचार की बू अब आम हो चली है। रुस्तम फूड्स, मास एग्रो फूड्स और AOV एक्सपोर्ट जैसी बड़ी कंपनियां खुलेआम पशु क्रूरता अधिनियम, प्रदूषण कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की धज्जियाँ उड़ा रही हैं—जिन ट्रकों में अधिकतम छह भैंसें लादी जा सकती हैं, उनमें 4 से 8 तक जानवरों को बेरहमी से ठूंसकर लादा जाता है, न कोई डॉक्युमेंट, न पशु चिकित्सा प्रमाणपत्र, न ही हवा-पानी या पुआल की व्यवस्था—लेकिन पुलिस थाना दही और जिम्मेदार अफसर इस पर चुप हैं क्योंकि उन्हें हर महीने ‘मुंह बंदी शुल्क’ पहुंचाया जाता है। एक वायरल ऑडियो में रुस्तम फूड्स का कर्मचारी ड्राइवर को सिखा रहा है कि पुलिस को कह दो “केवल दो भैंसे हैं”, और जब सोशल एक्टिविस्ट ने इसकी शिकायत की तो थाना प्रभारी संजीव कुशवाहा ने उल्टे उससे ही सवाल किया कि “तुम वहां कर क्या रहे थे?”—क्या यही है पुलिस का चेहरा? अब सवाल ये है कि आखिर कौन बचा रहा है इस काले कारोबार को? क्या योगी सरकार को नहीं पता कि गौवंश और पशु कल्याण की बात करने वालेलोगो लोग अपने ही शासन में पशुओं की निर्मम हत्या पर आंखें मूंदे बैठे हैं? क्या प्रधानमंत्री मोदी के ‘स्वच्छ भारत’ और ‘पर्यावरण सुरक्षा’ अभियान में उन्नाव की गंदगी का कोई हिसाब नहीं? जब बच्चे दूषित पानी से बीमार होते हैं, खेत खून से सींचे जाते हैं, और ट्रकों में तड़पती भैंसें दिखती हैं, तब ये कैसा अमृतकाल है? जनता अब पूछ रही है—क्या ये ‘विकास’ है या ‘विनाश’? अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्नाव न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश की आंतरिक सड़ांध की सबसे बड़ी मिसाल बन जाएगा। इस पूरे मामले की सीबीआई जांच, स्लॉटर हाउसों के लाइसेंस की समीक्षा और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए, नहीं तो आने वाले समय में उन्नाव सिर्फ इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि बीमारी, भ्रष्टाचार और बेबसी की कहानी बनकर रह जाएगा।

