- I love shahganj
सीधी-सादी थी… मगर लाजवाब थी वो लड़की,मेरी हर बात में, हर जज़्बात में बेहिसाब थी वो लड़की।
ना कोई किताब पढ़ी थी, ना सबक था कोई,
फिर भी ज़ेहन में जैसे नक़्श-ए-ख़्वाब थी वो लड़की।
लोग अक्सर पूछते थे — “मोहब्बत कैसी होती है?”
मैं मुस्कुरा देता था… क्योंकि जवाब थी वो लड़की।
हर रोज़ बहाने से सवाल करती, मुझे छेड़ती थी,
गुस्सा आए तो खिलखिला कर कहती — “ओहो! बड़ा नाज़ुक है तू!”
बिलकुल खराब… पर बेमिसाल थी वो लड़की।
चलना, बोलना, उसकी अदा में कुछ खास था,
जैसे क़ुदरत ने खुद अपनी फुर्सत में बनाया था वो लड़की।
दिल में छुपाए बैठी थी समुंदर मोहब्बत का,
जब ज़ाहिर हुआ… तो तूफ़ान से भी बेहिसाब थी वो लड़की।
ना खुशी कहती, ना ग़म ज़ाहिर करती, बस ख़ामोशी ओढ़े रहती…
जैसे कोई राज़ थी वो लड़की।
अब तो ख्वाबों में भी न आती है वो,
शायद किसी और की दुआओं का जवाब थी वो लड़की।
इश्क जो किया, तो सीमाएं मिटा दीं,
मेरे लिए शहर नहीं…पूरा पंजाब थी वो लड़की।
ना लिखा गया, ना पढ़ा गया, फिर भी दिल में बस गई — बेइंतिहा यादों का हिसाब थी वो लड़की…!!

