सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2025 को अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया। यह फैसला एक याचिका की सुनवाई के दौरान लिया गया, जिसमें प्रोफेसर पर लगे आरोपों की जांच चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बार-बार सुनवाई स्थगित करना गंभीर चूक है।
प्रोफेसर अली खान के खिलाफ मामला पिछले कुछ महीनों से चर्चा में है, और उनके समर्थकों का कहना है कि यह एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का दावा है कि उनके खिलाफ ठोस सबूत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।
इस फैसले ने अकादमिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर बहस छेड़ दी है। कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने इसे कानूनी प्रक्रिया में देरी का कारण बताया है।

