मुंबई: महाराष्ट्र में हिंदी भाषा को प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने के सरकार के फैसले को वापस लेने के बाद एक ऐतिहासिक घटना हुई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 20 साल बाद एक मंच साझा किया। दोनों भाइयों ने मुंबई के वर्ली में “विजय रैली” को संबोधित करते हुए बीजेपी पर मराठी भाषा और संस्कृति पर हमला करने का आरोप लगाया। इस रैली में हजारों समर्थकों ने हिस्सा लिया, जो भाषाई अस्मिता की रक्षा के लिए एकजुट हुए।
उद्धव ठाकरे ने कहा, “मराठी हमारी पहचान है, और इसे कमजोर करने की कोई कोशिश बर्दाश्त नहीं होगी।” राज ठाकरे ने भी बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, “हिंदी थोपने की साजिश को जनता ने नाकाम कर दिया।” इस फैसले को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी सराहा, इसे भाषाई अधिकारों की जीत बताया।
यह पुनर्मिलन महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि ठाकरे बंधुओं का अलगाव लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। हिंदी भाषा विवाद ने मराठी अस्मिता को फिर से केंद्र में ला दिया है, और इस रैली ने विपक्षी दलों को एकजुट करने का संकेत दिया है। कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया, लेकिन कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह गठजोड़ कितना टिकाऊ होगा, यह भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर निर्भर करेगा। इस बीच, बीजेपी ने इस रैली को “राजनीतिक नाटक” करार देते हुए कहा कि भाषा के नाम पर वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।

