मुंबई, रविवार 12 मई 2025 को चित्रनगरी संवाद मंच, मुम्बई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. निर्मोही फड़के द्वारा लिखित व डॉ. वसुधा सहस्रबुद्धे द्वारा अनुवादित कहानी संग्रह ‘ हूँ मुक्त फिर भी’ का विमोचन डॉ. उषा मिश्रा, डॉ. सुलभा कोरे, ज्ञान प्रकाश गर्ग, देवमणि पांडेय तथा नवीन चतुर्वेदी के हाथों मृणाल गोरे सभागृह, गोरेगांव मुंबई में सम्पन्न हुआ।
‘हूँ मुक्त फिर भी’ पुस्तक का परिचय देते हुए डॉ उषा मिश्र ने कहा कि इस संग्रह की कहानियां आस्था, विश्वास और मानवीय सम्वेदना से परिपूर्ण हैं। अतिथि वक्ता डॉ सुलभा कोरे ने इन कहानियों को सकारात्मकता से समृद्ध और मन को छूने वाली बताया। इस पुस्तक की मूल लेखिका डॉ निर्मोही फड़के ने भी अपनी भावनाओं का इज़हार किया। डॉ मधुबाला शुक्ल ने संचालन और देवमणि पांडेय ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर चन्द्रकांत भोंजाल , अरुण शेवते, रविंद्र कात्यायन,महेश साहू , अर्चना जौहरी, पूनम विश्वकर्मा , प्रो राम बक्ष, गंगाशरण सिंह, कवि प्रदीप गुप्ता, कवयित्री कुसुम तिवारी, कवयित्री सत्यवती मौर्य, शायर क़मर हाजीपुरी, पत्रकार हरगोविंद विश्वकर्मा, पत्रकार इरफ़ान सामी, कवि अरिहंत अनुरागी, अभिनेता अनुज वर्मा सहित कई हिंदी और मराठी के रचनाकार मौजूद थे।

