मेरठ। लम्बे समय से सनातन और ब्राह्मण को बदनाम करने की अच्छी चल रही कहानी, चौकाने वाली घटना आई सामने लोग हो रहे हैरान। बताया जाता है कि युवक कासिम धर्म छिपाकर दादरी के शिव मंदिर में 10 साल से पुजारी कृष्णा बनकर रह रहा था। यू-ट्यूब से दुर्गा और हनुमान चालीसा और मंत्र याद किए। हाथों की रेखा देखकर उपाय भी बताता था। कांवड़ यात्रा के दौरान पहचान उजागर करने के मामले को लेकर वह डर गया और कांवड़ लेने का बहाना बनाकर 15 दिन पहले मंदिर से चला गया और मुजफ्फरनगर के काली माता मंदिर में रहने लगा। कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद वापस आया। दानपात्र में रकम कम मिलने पर ग्रामीणों को शक हुआ। ग्रामीणों ने कासिम से आधार कार्ड मांगा तो वह नहीं दे पाया। पुलिस को बुलाया तो
मामले का पर्दाफाश हुआ। सीतामढ़ी (बिहार) के अब्बास वहां की एक मस्जिद में मौलवी हैं।
हनुमान चालीसा याद की, यू-ट्यूब से सीखे मंत्र, हाथ देखकर देता था सलाह, 15 साल पहले बिहार से भागकर दिल्ली आया था, पुलिस ने किया गिरफ्तार, उसके पांच बेटों में सबसे छोटा 36 वर्षीय कासिम पारिवारिक कलह के चलते 15 साल पहले घर छोड़कर दिल्ली आ गया था। पांच साल दिल्ली में रहकर वह दादरी स्थित शिव मंदिर में पहुंचा। वहां पर साफ-
सफाई और पूजा-पाठ करने लगा। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि कासिम ने दिल्ली में रहते हुए दुर्गा और हनुमान चालीसा याद किया था। साथ ही मंत्र, पूजा-पाठ एवं हस्तरेखा का ज्ञान हासिल किया। उसने अपना नाम कृष्णा बताया था। कांवड़ यात्रा के दौरान पहचान उजागर करने का मामला उठा तो कासिम डर गया। वह ग्रामीणों को कहकर गया कि कांवड़ लेने हरिद्वार जा रहा है। दानपात्र की चाबी ले गया और काली माता मंदिर में जाकर रहने लगा। बुधवार को वह गांव लौटा था।
ऐसे उठा पर्दा ग्राम प्रधान, प्रवीण मोतला ने बताया कि कासिम उर्फ कृष्णा के आने पर दानपात्र खोला गया। दानपात्र में रकम कम मिलने पर शक हुआ तो पुजारी कृष्णा से आधार कार्ड मांगा गया।

