- ओमकार त्रिपाठी (अखंड राष्ट्र)
11 जून 2025 को क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद बिस्मिल की 128वीं जयंती देशभर में श्रद्धा के साथ मनाई गई। शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में उनके जन्मस्थल पर स्मृति सभा आयोजित हुई, जिसमें स्थानीय लोग, इतिहासकार और युवा शामिल हुए। कई नेताओं और सामाजिक संगठनों ने सोशल मीडिया पर #बिस्मिल_जयंती के साथ उनके बलिदान को याद किया। स्कूलों और कॉलेजों में उनके लेखन और कविताओं पर आधारित कार्यक्रम हुए, जिसमें उनकी प्रसिद्ध रचना “सरफरोशी की तमन्ना” गूंजी।
रामप्रसाद बिस्मिल का जन्म 11 जून 1897 को शाहजहांपुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से ही देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत, उन्होंने 18 साल की उम्र में क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लिया। हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) के संस्थापक सदस्य के रूप में उन्होंने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया। 1925 के काकोरी कांड, जिसमें क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाने को लूटकर हथियार खरीदे, ने उन्हें चर्चा में लाया। इस घटना ने ब्रिटिश सरकार को हिलाकर रख दिया।
बिस्मिल न केवल क्रांतिकारी थे, बल्कि एक कवि, लेखक और विचारक भी थे। उनकी आत्मकथा और कविताएं, जैसे “मेरा रंग दे बसंती चोला,” आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं। 1927 में, मात्र 30 वर्ष की आयु में, उन्हें ब्रिटिश सरकार ने फांसी दे दी। उनके बलिदान ने स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी।
आज उनकी जयंती पर शाहजहांपुर में उनके स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। कई संगठनों ने रक्तदान शिविर और सामाजिक कार्य किए। बिस्मिल का जीवन देशभक्ति और साहस का प्रतीक है, जो आज भी प्रासंगिक है।शब्द गणना: 300

